सरकार की पोल खोलता बाज़ार..
एक बहुत पुरानी कहावत है..अगर बाज़ार की हकीक़त समझनी है तो व्यापारी को समझो..ये देख लो कि व्यापारी क्या कर रहा है, वो कहां पैसा लगा रहा है, क्योंकि सरकार जनता को चूतिया बना सकती है..बाज़ार को नहीं..कहा भी गया है-“यथा महाजन तथे पंथा”..हालांकि, यहां पर महाजन का अर्थ व्यापारी नहीं बल्कि गुणीजन या महापुरुष हैं..फिर भी इसके लिए महाजन शब्द का चुना जाना ये बताता है कि आम तौर पर महाजन समुदाय को ज़मीनी हकीकत को समझने वाला माना जाता है..
फिलहाल मैं ये बात शेयर बाज़ार के संदर्भ में बोल रहा हूं..आज से ठीक एक साल पहले यानी 27 सितंबर 2024 को सेंसेक्स ऑल टाइम हाई (85,978.25) पर था..राउंड फीगर में 86,000 मान लीजिए..और आज एक साल बाद सेंसेक्स 80,426.46 प्वाइंट पर है..यानी पिछले साल इसी दिन की तुलना में मार्केट साढ़े पांच हज़ार प्वाइंट गिरा है..मार्च 2025 में तो 71, 425 तक गिर गया था..लेकिन साढ़े चौदह हज़ार प्वाइंट..थोड़ा बाउंसबैक किया,लेकिन 80 हज़ार तक ही पहुंच पाया..ये हाल तब है, जब सरकार ने इनकम टैक्स से लेकर GST तक में छूट दी है..GDP की विकास दर भी कथित तौर पर 7.8 प्रतिशत रही..फिर भी क्यों गिर रहा बाज़ार?
जवाब वही है..आप जनता का चूतिया बना सकते हैं, बाज़ार को नहीं..सरकार जो आंकड़े पेश कर रही है, बाज़ार ये समझ रहा है कि ये Data Fudging है..यानी आंकडों में हेराफेरी की जा रही है..झूठे आंकड़े पेश किए जा रहे हैं…सरकार भले ही GDP की विकास दर 7.8 प्रतिशत बता रही हो, लेकिन हकीकत में अर्थव्यवस्था की हालत खराब है..ऐसा नहीं है कि ये बात सरकार को पता नहीं है..सरकार को भी सच का पता है, लेकिन वो इसे कुबूल नहीं करना चाहती..हेडलाइन मैनेजमेंट करना है..अर्थव्यवस्था की गुलाबी तस्वीर पेश करनी है..
सरकार को भी डूबती अर्थव्यवस्था का पता है..ज़्यादा डिटेल में नहीं जाऊंगा, वर्ना आपके समझ नहीं आएगा..
2 उदाहरणों से समझाता हूं..
सरकार ने इसी साल इनकम टैक्स में भी राहत थी और GST में भी..मोदी सरकार के 11 साल के कार्यकाल का रिकॉर्ड बताता है कि आर्थिक राहत देने के मामले में सरकार बहुत कंजूस है तो फिर आखिर एक ही साल में दो-दो आर्थिक राहतें क्यों दी?
क्योंकि सरकार को भी पता है कि लोगों की दशा खराब है..Consuption घट गया है..उपभोग या तो स्थिर है या घट गया है..लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसा नहीं है, जिनके पास है, वो भी खर्च नहीं कर रहे, क्योंकि उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है..भविष्य के लिए बचा रहे हैं..12 लाख तक की इनकम में टैक्स लगाने के बावजूद लोग खर्च नहीं कर रहे थे..यही वजह है कि फरवरी में इनकम टैक्स में छूट की एलान के बाद भी जब वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में उपभोग नहीं बढ़ा तो सरकार GST के स्लैब में बदलाव कर राहत देने की कोशिश की..ताकि लोग अब तक खर्च करें..
लेकिन यहां भी सरकार ने अपनी आदत के अनुसार एक चालाकी करने की कोशिश की..सरकार ने 22 सितंबर यानी नवरात्र की शुरुआत से GST में छूट लागू की..खूब ढोल पीटा गया इसका..लेकिन बाज़ार ने सरकार की पोल फिर खोल दी..22 से 26 सितंबर के बीच सेंसेक्स ढाई हज़ार प्वाइंट गिरा..पूरे हफ्ते गिरावट रही..क्लाईमैक्स शुक्रवार को ही हुआ, यानी ट्रेडिग के आखिरी दिन..इस दिन बाज़ार करीब साढ़े सात सौ प्वाइंट गिरा..सात महीने में सबसे बड़ी गिरावट..एक ही दिन में आम निवेशकों के साढ़े छह लाख करोड़ स्वाहा हो गए..
हमने क्यों कहा कि सरकार ने GST पर अपनी आदत के अनुसार चालाकी की, वो इसलिए कि शरदीय नवरात्र से लेकर दीपावली के बीच तो खरीदारी में जंप आता ही है..GST कम होता या ना होता, लोग फिर भी सामान लाते..नवरात्र से दीपावली के बीच ये हर साल का ट्रैंड है..लेकिन सरकार Consuption में आने वाले इस सालाना जंप को GST के खाते में डालकर अपनी पीठ थपथपाना चाहती थी, इसलिए उसने नवरात्र की शुरुआत से GST में कमी को लागू किया..
लेकिन दिक्कत ये है कि GST में छूट लागू होने के बाद भी लोग वही सामान खरीद रहे हैं, जो वो खरीदना चाहते हैं..जो उन्हें ज़रूरी लग रहा है..कोई भी से सोचकर सामाना नहीं उठा ला रहा है कि सस्ता हो गया है, इसलिए खरीद लेते हैं..सरकार भले ही Fudging वाला Data दे, लेकिन बाज़ार को, उद्योगपतियों को तो हकीकत मालूम है..इसलिए वो ना तो अपना कारोबार एक्सपेंड कर रहे हैं..ना ही इंवेस्ट कर रहे हैं..FII यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने तो पिछले एक साल से ही भारतीय शेयर बाज़ार से दूरी बना रखी है. 7.8% की विकास दर के सरकारी दावों पर उन्हें भी यकीन नहीं है..
तो इस सबमें पिस कौन रहा है? ज़ाहिर सी बात है आम निवेशक..सरकार हमेशा मंदी से अछूती रहती है..जो सरकार के दलाल हैं, वो भी माल कूट रहे हैं..सोना एक लाख के पार है..प्रॉपर्टी एक करोड़ के पार..छोटे निवेशकों ने शेयर मार्केट से उम्मीद लगा रखी थी, वो भी चौपट कर दिया..FII इस साल अब तक 60 हज़ार करोड़ रूपये निकालकर जा चुके हैं, जो पिछले साल से ज़्यादा है..प्याज ना खाने वाली वित्त मंत्री ने पिछले साल लोकसभा में खड़े होकर बहुत ही अहंकारी तरीके से बयान दिया था कि FII के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता, DII (डोमेस्टिक) संभाल लेंगे..लेकिन शेयर मार्केट लहूलुहान है..LTCG-STCG समेत दुनियाभर के टैक्स लगा दिए हैं तो ज़ाहिर है प्रॉफिट मार्जिन घटने से FII अपनी पूंजी निकालकर वहां ले जाएंगे, जहां लाभ होगा..
अब आप कहेंगे कि अमेरिकी टैरिफ की वजह से मार्केट डूबा है..तो मेरा कहना है कि अमेरिका से हमने पंगा किसके फायदे के लिए लिया है..रूस से सस्ता तेल खरीदकर ऊंचे दाम में बेचकर कौन फायदा कमा रहा है..क्या इससे सस्ते तेल का फायदा ग्राहकों को दिया गया?
कुल मिलाकर अदम गोंडवी के शब्दों में कहें तो
तुम्हारी फाइलों में इकोनॉमी का मौसम गुलाबी है
मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है
उधर जीएसटी का ढोल पीटे जा रहे हैं वो
इधर परदे के पीछे घाटा और गरीबी है
लगी है होड़-सी देखो अमीरी और गरीबी में
सरकार की आर्थिक नीतियों में बुनियादी खराबी है
तुम्हारी मेज़ चांदी की तुम्हारे जाम सोने के
आम जनता के घर में आज भी फूटी रक़ाबी है
नोट- अपने पाठकों से मिल रहे स्नेह और सम्मान के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
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अंकित विजय की कलम से….☝️☝️



