तो क्या हड़बड़ी में किया #आत्मघाती_धमाका …!

1 min read

तो क्या हड़बड़ी में किया #आत्मघाती_धमाका …!

यानी साजिश तो चल रही थी पर अचानक गिरफ्तारियां और विस्फोटक बरामदगी से घबरा गए आतंकी।

धमाके से पहले कार में तीन घन्टे बैठा रहा आतंकी

लालकिलाविस्फोट

सोमवार शाम भारत की राजधानी दिल्ली में भीषण विस्फोट ने पूरे देश को हिला दिया। यह विस्फोट लाल किले के पास मेट्रो गेट नंबर एक के पास शाम 6:52 बजे एक हुंडई i20 कार (सफेद रंग, नंबर प्लेट: HR26 7674) में हुआ था।

इस आत्मघाती विस्फोट में कम से कम 13 लोग मारे गए और 20 से अधिक लोग घायल हुए। यह एक योजनाबद्ध संगठित आतंकवादी हमला था जो एक बड़े आतंकवादी नेटवर्क से जुड़ा हुआ था, जिसे “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” कहा जाता है।

दोपहर बाद 3:19 बजे, एक सफेद i20 कार को दिल्ली की सुनेहरी मस्जिद के पास एक पार्किंग लॉट में प्रवेश करते देखा गया। इस कार के अंदर एक व्यक्ति था जो नीले-काले टी-शर्ट पहने था। यह व्यक्ति लगभग तीन घंटे तक कार में ही रहा।

CCTV फुटेज से पता चलता है कि वह कार से कभी बाहर नहीं निकला। इस दौरान वह किसी की प्रतीक्षा कर रहा था या अपने पाकिस्तान-आधारित हैंडलर्स से निर्देश प्राप्त कर रहा था।

यह तीन घंटे की प्रतीक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि यह हमला पूरी तरह से संगठित था और किसी बड़ी आतंकवादी शक्ति द्वारा नियंत्रित था।

शाम 6:48 बजे, कार पार्किंग लॉट से निकली और दारागंज बाजार क्षेत्र से होकर छाता रेल चौक की ओर मुड़ी। यह मार्ग लाल किले के सबसे भीड़-भाड़ वाले इलाके से गुजरता है, जहां अधिकतम नुकसान संभव था।

मात्र चार मिनट बाद, शाम 6:52 बजे, कार लाल किले के मेट्रो गेट नंबर 1 के पास एक लाल सिग्नल पर रुकी। अचानक एक जोरदार विस्फोट हुआ जो इतना तेज था कि सड़क की बत्तियां बंद हो गईं और आग की लपटें कई मीटर ऊपर उठीं।

विस्फोट के तुरंत बा जांच में जल्द ही पता चल गया कि यह कार किसी आतंकवादी के नाम पर पंजीकृत थी। इस कार का मालिक तारिक निकला, जो जम्मू-कश्मीर के #पुलवामा से था।

कार चालक आत्मघाती डॉ. #उमर_मोहम्मद एक चिकित्सा डिग्री धारक था, हालांकि उसकी सटीक शैक्षिक विशेषज्ञता अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

डॉ उमर मोहम्मद जैश-ए-मोहम्मद का सदस्य और फरीदाबाद आतंकी मॉड्यूल का एक महत्वपूर्ण सदस्य था और विस्फोटक तैयार करने और इलेक्ट्रॉनिक्स संबंधी तकनीकों में विशेषज्ञ था।

जांच एजेंसियां यह मानती हैं कि वह विस्फोट के समय कार के अंदर ही था और आत्मघाती हमले में मारा गया। उसके शरीर के जले हुए अवशेषों से #DNA परीक्षण की जांच अभी चल रही है ताकि यह पुष्टि हो सके कि यह वही आतंकवादी था।

ऐसा लगता है कि डॉ. उमर मोहम्मद ने घबराहट और हड़बड़ी में यह धमाका किया। 9 नवंबर को, यानी विस्फोट से एक दिन पहले, फरीदाबाद में एक बड़े ऑपरेशन में आतंकवादी डॉ. मुजम्मिल शकील को गिरफ्तार किया गया।
साथ ही, उसके दो किराए के घरों से कुल 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।

यह एक बड़ा खुलासा था। डॉ. उमर मोहम्मद को अपनी गिरफ्तारी का गहरा डर सताने लगा। वह जानता था कि अब उसका समय समाप्त हो गया है और जल्द ही पुलिस उसे भी गिरफ्तार कर लेगी। इसी घबराहट में, उसने और उसके अन्य साथियों ने लाल किले पर एक आत्मघाती हमले की योजना बनाई। यह एक “आखिरी विकल्प” था – कम से कम कुछ नुकसान पहुंचा दिया जाए और एक बड़ा संदेश दिया जाए।

इसलिए उसने अपने पास मौजूद विस्फोटक से लाल किले के पास भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में आत्मघाती धमाका किया।

यह विस्फोट एक बड़े आतंकवादी नेटवर्क का हिस्सा था जिसे अब आप सभी के कहे अनुसार “व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल” के नाम से जाना जा रहा है। इसमें शामिल लोग शिक्षित, प्रशिक्षित पेशेवर थे जो समाज के सम्मानित सदस्य माने जाते हैं।

डॉ. मुजम्मिल शकील इस मॉड्यूल का सबसे महत्वपूर्ण सदस्य है, जो पुलवामा, जम्मू-कश्मीर का निवासी है और #अल_फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद में एक #MBBS डॉक्टर और शिक्षक के रूप में काम कर रहा था।
वह अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में भी कार्यरत था।

उसकी गिरफ्तारी से पहले, फरीदाबाद के दाऊज गांव में उसके द्वारा किराए पर लिए गए एक मकान से 360 किलो RDX, AK-47 राइफल, पिस्तौल, गोला-बारूद और इलेक्ट्रॉनिक टाइमर बरामद किए गए। लेकिन यह खोज पर्याप्त नहीं थी। चार किलोमीटर दूर फतेहपुर तगा गांव में, जहां उसने एक और मकान किराए पर रखा था, वहां से 2,900 किलो अतिरिक्त विस्फोटक सामग्री बरामद की गई।

डॉमुजम्मिलशकील के साथ डॉ. आदिल अहमद रठार भी गिरफ्तार किया गया । वह कुलगाम/अनंतनाग, जम्मू-कश्मीर से MBBS डॉक्टर था जो सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के एक निजी अस्पताल में काम कर रहा था। उनके पास से AK-47 राइफल और गोला-बारूद बरामद किए गए।

तीसरी महिला आतंकवादी डॉ. शाहीन शाहिद थी, जो लखनऊ से थीं और अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत थी। उसकी स्विफ्ट डिजायर कार से एक क्रिंकोव असॉल्ट राइफल, तीन मैगजीन, 83 राउंड गोली, एक पिस्तौल और गोला-बारूद बरामद किए गए।

यह पहली बार नहीं है कि भारत में शिक्षित, पेशेवर मुस्लिम आतंकवादी संगठनों की सदस्यता ले रहे हैं, लेकिन यह घटना चिंताजनक है क्योंकि यह दर्शाती है कि आतंकवादी संगठन अब युवा, शिक्षित, प्रशिक्षित पेशेवरों को लक्षित कर रहे हैं।

विस्फोट में प्रयोग की गई i20 कार के मालिकाना अधिकार की खोज की पूरी कहानी ही एक अलग जांच विषय है। कार पहले मोहम्मद सलमान (दिल्ली) के नाम पर पंजीकृत थी। फिर इसे नदीम ने खरीद लिया। फिर यह कार “रॉयल कार जोन” नामक फरीदाबाद की यूज्ड कार डीलरशिप के पास गई। वहां से इसे तारिक (पुलवामा, जम्मू-कश्मीर का निवासी) ने खरीद लिया।

कार की आधिकारिक दस्तावेजें अभी भी सलमान के नाम पर थीं, जिसका मतलब है कि स्वामित्व की श्रंखला पूरी तरह से गड़बड़ी में थी। यह कार की बार-बार बिक्री और मालिक के बदलना एक ठेठ आतंकवादी तरीका है जिसका उपयोग आतंकवादी समूह वाहनों को ट्रैस करना मुश्किल बनाने के लिए करते हैं। इस प्रकार, कार को लेकर यह पूरी कहानी एक अच्छी तरह से योजनाबद्ध ऑपरेशन का संकेत देती है।

जो विस्फोटक सामग्री प्रयोग की गई, वह उन्नत तकनीक का प्रमाण है। मुख्य घटक ANFO (अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल) का मिश्रण था, संभवतः अमोनियम नाइट्रेट और RDX के साथ। यह बेहद दहनशील पदार्थ है जिसका उपयोग औद्योगिक विस्फोटकों में किया जाता है।

फरीदाबाद में बरामद 2,900 किलो सामग्री से अनुमान लगाया जा सकता है कि इस विस्फोट में कम से कम 100-150 किलो विस्फोटक प्रयोग किया गया होगा।

फोरेंसिक साक्ष्य से पता चलता है कि विस्फोट साइट पर कोई गड्ढा या क्रेटर नहीं मिला, जिसका मतलब है कि विस्फोट एक चलती हुई कार में हुआ था। घायलों के शरीर पर कोई गोली या छर्रे के निशान नहीं मिले, जिससे पता चलता है कि यह एक शुद्ध विस्फोट था, किसी शूटिंग का नहीं। यह विस्फोट की गंभीरता और आतंकवादियों की तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।

शव के जले हुए अवशेषों से DNA परीक्षण अभी चल रहा है ताकि यह पुष्टि हो सके कि डॉ. उमर मोहम्मद वास्तव में विस्फोट में मारा गया था या नहीं।

अब प्रश्न यह उठता है कि आतंकवादियों ने लाल किले पर हमला करने से पहले सुनेहरी मस्जिद को अपनी तैयारी का ठिकाना क्यों बनाया? इसके पीछे कई रणनीतिक कारण थे।

●सबसे पहले, सुनेहरी मस्जिद के पास अच्छी पार्किंग सुविधा है और पार्किंग लॉट में कार को छिपाना आसान था।

●दूसरा, धार्मिक स्थान पर CCTV निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे संदेह पैदा होने की संभावना कम थी।

●तीसरा, यह स्थान लाल किले से सिर्फ 4-5 मिनट की दूरी पर है, जो हमले के लिए आदर्श दूरी है।

●चौथा, एक धार्मिक स्थान से आतंकवादी हमला करना एक “संदेश” भेजना है – यह दर्शाता है कि आतंकवादी कहीं से भी हमला कर सकते हैं।

●पांचवां, इस क्षेत्र में काफी भीड़ होती है, इसलिए कार के साथ व्यक्ति को लंबे समय तक पार्किंग में बैठे रहने से कोई संदेह नहीं करेगा। यह सब कुछ मिलाकर दर्शाता है कि यह हमला कितनी सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध था।

विस्फोट के तुरंत बाद, भारत की सभी महत्वपूर्ण जांच एजेंसियां इस मामले में सक्रिय हो गईं।
जांच की कई महत्वपूर्ण दिशाएं हैं जो अभी तक चल रही हैं।

-पहली दिशा DNA परीक्षण है – जांच एजेंसियां विस्फोट साइट से बरामद शरीर के जले हुए अवशेषों से DNA परीक्षण कर रही हैं ताकि यह पुष्टि हो सके कि यह वास्तव में डॉ. उमर मोहम्मद था।

-दूसरी दिशा पाकिस्तान-आधारित हैंडलर्स (संचालकों) का खुलासा करना है।

-तीसरी दिशा देश भर में अन्य संभावित #आतंकवादी सेल की खोज करना है – जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह नेटवर्क केवल फरीदाबाद-दिल्ली तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरे देश में फैला हुआ है।

-चौथी दिशा यह पता लगाना है कि क्या अन्य देशों (विशेषकर पाकिस्तान) की कोई भूमिका है।

-पांचवीं दिशा यह समझना है कि कैसे इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री (2,900 किलो) को लाया गया और कहां से लाया गया।

यह घटना कई गंभीर चिंताओं का कारण बन गई है।

▪︎पहली चिंता यह है कि आतंकवादी संगठन अब शिक्षित, पेशेवर, सम्मानित सदस्यों को भर्ती कर रहे हैं। डॉक्टर, शिक्षक, अन्य पेशेवर लोग आतंकवादी नेटवर्क में शामिल हो रहे हैं। यह बेहद खतरनाक है क्योंकि ऐसे लोग आसानी से पकड़े नहीं जाते और संदेह के दायरे में नहीं आते।

▪︎दूसरी चिंता विस्फोटक तैयार करने की तकनीकी दक्षता है – जिससे पता लगता है कि आतंकवादियों के पास उच्च स्तर की तकनीकी शिक्षा है।

▪︎तीसरी चिंता संगठन की शक्ति है – यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित है, पाकिस्तान से निर्देश प्राप्त कर रहा है।

▪︎चौथी चिंता विस्फोटक सामग्री का विशाल भंडार है – 2,900 किलो से अधिक सामग्री देश को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

▪︎पांचवीं चिंता यह है कि 7-8 लोग पहले से ही गिरफ्तार हो चुके हैं, लेकिन जांच से पता चलता है कि अभी भी कई और लोग फरार हैं जिन्हें गिरफ्तार किया जाना बाकी है।

इस नेटवर्क के कई संभावित लक्ष्य थे जो अभी तक निष्क्रिय हैं। दिल्ली और आस-पास के शहर इस नेटवर्क के मुख्य लक्ष्य थे। बड़े सार्वजनिक समारोह, जहां भीड़ हो, ये सब लक्ष्य हो सकते हैं। पर्यटन केंद्र जैसे लाल किला, ताज महल आदि लक्ष्य हो सकते हैं। परिवहन केंद्र जैसे मेट्रो, रेलवे स्टेशन आदि भी लक्ष्य हो सकते हैं।

गुजरात #ATS की जांच में यह भी सामने आया है कि #RSS कार्यालय लखनऊ और दिल्ली की अजादपुर मंडी भी इस नेटवर्क के संभावित लक्ष्य थे।

यह एक सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध, संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित आतंकवादी हमला था जो याद दिलाती है कि आतंकवाद कहीं से भी, किसी से भी आ सकता है।

नागरिक सतर्कता अत्यंत महत्वपूर्ण है। संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत सूचना देनी चाहिए। सार्वजनिक स्थानों पर सजग रहना चाहिए। और सबसे महत्वपूर्ण, हमें अपने सुरक्षा बलों और जांच एजेंसियों पर विश्वास रखना चाहिए जो ऐसी खतरनाक साजिशों को उजागर करने में निरंतर काम कर रहे हैं।

SPY POST https://spypost.in/

राजनीति और सामाज के अंदर तक घुसपैठ कर चुके विषैले विषाणुओं को मारने वाला किटाणुनाशक....
एडवेंचर पत्रकारिता से प्यार और किसी भी कीमत पर सच सामने लाने की जिद.....
"जो नहीं हो सकता वहीं तो करना है".....

You May Also Like

More From Author