क्या पुलिस स्टेशन में कोई भी रिकॉर्ड कर सकता है वीडियो? जानें क्या कहते हैं नियम……👇👇

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क्या पुलिस स्टेशन में कोई भी रिकॉर्ड कर सकता है वीडियो, जानें क्या कहते हैं नियम?

पुलिस स्टेशन में वीडियो रिकॉर्डिंग करना आपके कानूनी अधिकारों का हिस्सा है, लेकिन इसे जिम्मेदारी से करना अनिवार्य है। बॉम्बे हाईकोर्ट इसे प्रतिबंधित क्षेत्र नहीं मानता, बशर्ते काम में बाधा न हो।

क्या पुलिस स्टेशन में कोई भी रिकॉर्ड कर सकता है वीडियो, जानें क्या कहते हैं नियम?

पुलिस स्टेशन में वीडियो बनाने के नियम

काम में बाधा डाले बिना रिकॉर्डिंग करना उचित।
पुलिस स्टेशन अक्सर आम आदमी के लिए डर और अनिश्चितता की जगह होते हैं। जब हमें वहां किसी जरूरी काम या शिकायत के लिए जाना पड़ता है, तो मन में कई तरह के सवाल होते हैं। क्या हम अपनी सुरक्षा के लिए वहां वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं? क्या पुलिस हमारा फोन छीन सकती है? ऐसे में कानून की स्पष्ट जानकारी होना बहुत जरूरी है, क्योंकि यह न केवल आपके अधिकारों की रक्षा करती है, बल्कि पुलिस की मनमानी पर लगाम लगाने का एक ताकतवर जरिया भी साबित होती है।

क्या वीडियो बनाने के लिए प्रतिबंधित है थाना?

आम तौर पर पुलिस स्टेशनों के माहौल को देखते हुए लोग वहां वीडियो बनाने या रिकॉर्डिंग करने से कतराते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करने पर उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन हकीकत यह है कि बॉम्बे हाईकोर्ट समेत भारत की कई अदालतों ने स्पष्ट किया है कि थाना कोई प्रतिबंधित क्षेत्र नहीं है। एक नागरिक के तौर पर आप पारदर्शिता और अपनी सुरक्षा के लिए वहां वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं। यह आपके संवैधानिक अधिकारों के दायरे में आता है।

अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19(1)(a) हर नागरिक को बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी देता है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पुलिस की ड्यूटी के दौरान वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड करना इस अधिकार के अंतर्गत आता है। यह रिकॉर्डिंग पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। अगर कोई पुलिसकर्मी आपसे आपकी रिकॉर्डिंग करने की वजह पूछे, तो आप शालीनता से कह सकते हैं कि आप अपनी सुरक्षा के लिए ऐसा कर रहे हैं।

फोन छीनना या डेटा मिटाना अवैध

सबसे बड़ा डर यह होता है कि पुलिस अधिकारी आपका फोन छीन लेंगे या रिकॉर्डिंग डिलीट कर देंगे। स्पष्ट रहे कि कानून के तहत किसी भी पुलिस अधिकारी को आपका फोन छीनने, उसे तोड़ने या उसमें मौजूद डेटा (रिकॉर्डिंग) को डिलीट करने का अधिकार नहीं है। यदि कोई ऐसा करता है, तो यह आपकी निजी संपत्ति का हनन और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है। ऐसे मामले में आप उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

पुलिस के काम में न डालें बाधा…

रिकॉर्डिंग का अधिकार मिला है, लेकिन यह अधिकार आपको पुलिस के काम में बाधा डालने की छूट नहीं देता है
आप एक कोने में खड़े होकर रिकॉर्डिंग कर सकते हैं, लेकिन अगर आप पुलिस की जांच प्रक्रिया के बीच जाकर चिल्लाते हैं या जबरदस्ती कैमरा उनके चेहरे के पास ले जाते हैं, तो आप पर सरकारी काम में बाधा डालने (Obstruction of Public Servant) का मामला दर्ज किया जा सकता है। इसलिए रिकॉर्डिंग का तरीका शालीन और दूरी बनाकर रखना बहुत जरूरी है।

पुलिस स्टेशन में कहां गोपनीयता का ध्यान रखना जरूरी?

थाने के अंदर मौजूद हथियार भंडार (Armoury), गुप्त दस्तावेजों का कमरा या किसी उच्च-स्तरीय गोपनीय मीटिंग रूम की रिकॉर्डिंग करना पूरी तरह मना है। ये क्षेत्र राष्ट्रीय सुरक्षा और पुलिस की गोपनीयता से जुड़े होते हैं। यदि आप बिना अनुमति के इन स्थानों का वीडियो बनाने की कोशिश करेंगे, तो पुलिस आपको न केवल रोकेगी, बल्कि आप पर बीएनएस की धारा 225 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है।

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