जमशेदपुर में केरोसिन तेल में हो रहा खेल…..

झारखंड के खुले बाजारों में केरोसिन (मिट्टी का तेल) इस समय ₹70 से ₹100 प्रति लीटर की ऊंची कीमतों पर बिक रहा है। कुछ विशिष्ट या रिफाइंड (सफेद और कम गंध वाले) तेलों की कीमत बाज़ारों में ₹90 से ₹125 प्रति लीटर तक भी देखी जा रही है।PDS (जन वितरण प्रणाली) दुकानों से नियमित सप्लाई न मिलने और खुले बाजार में इसके महंगे होने के मुख्य कारण और स्थितियां नीचे दी गई हैं:
1. PDS दुकानों से तेल न मिलने के मुख्य कारणवैश्विक ईंधन संकट और नीतिगत बदलाव: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों और कच्चे तेल (Crude Oil) की आपूर्ति में उतार-चढ़ाव के कारण सरकार ने केरोसिन के वितरण नियमों में बदलाव किए हैं।सीमित आवंटन: अब सरकार द्वारा PDS के माध्यम से बेहद सीमित मात्रा में (लगभग 1 लीटर प्रति परिवार) और केवल चुनिंदा पात्र राशन कार्ड धारकों (जैसे NFSA लाभार्थी या विशेष राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत) को ही रियायती तेल देने की योजना है। इसके कारण अधिकांश आम राशन दुकानों तक नियमित स्टॉक नहीं पहुंच पा रहा है।
2. खुले बाजार (Open Market) में बिक्री का तरीकाचूंकि PDS से आम लोगों को पर्याप्त तेल नहीं मिल रहा है, इसलिए बाजारों में इसकी कालाबाजारी और खुले रूप से बिक्री इस प्रकार हो रही है:थोक और औद्योगिक डीलर: कई निजी और औद्योगिक सप्लायर (जैसे Tradeindia या IndiaMART जैसी कंपनियों से जुड़े स्थानीय वेंडर) खुले बाजार में व्यावसायिक उपयोग या घरेलू इमरजेंसी के लिए सीधा केरोसिन बेच रहे हैं।खुदरा या स्थानीय किराना दुकानें: सुदूर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में छोटे दुकानदार अवैध रूप से या ऊंचे दामों पर केरोसिन लाकर ₹80 से ₹100 प्रति लीटर के भाव पर बेच रहे हैं। गरीब परिवार जिन्हें बिजली कटने या एलपीजी की कमी के समय रोशनी और खाना पकाने के लिए मजबूरन इसकी जरूरत होती है, वे इसे महंगी दरों पर खरीदने के लिए विवश हैं।
पेट्रोल पंपों के जरिए वितरण: ईंधन संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अस्थायी नीति के तहत हर जिले के कुछ चुनिंदा पेट्रोल पंपों को भी अधिकतम 5,000 लीटर तक केरोसिन रखने और बेचने की छूट दी है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोग वहां से भी तेल खरीद सकें।
यदि आप सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर राशन दुकान से तेल पाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपके पास वैध राशन कार्ड और आधार लिंकेज होना जरूरी है, जिस पर राज्य सरकार वर्तमान योजनाओं के तहत बहुत ही मामूली सब्सिडी देती है।यदि आप अपने क्षेत्र विशेष की स्थिति जानना चाहते हैं, तो कृपया बताएं:आप झारखंड के किस जिले या क्षेत्र (जैसे- रांची, धनबाद, जमशेदपुर आदि) की बात कर रहे हैं?आपके पास कौन सा राशन कार्ड (जैसे- पीला, गुलाबी, या सफेद कार्ड) है?
सवाल उठना स्वाभाविक है। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार केरोसिन का वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जुड़ा हुआ है और पूर्वी सिंहभूम में जिला आपूर्ति शाखा इसके वितरण से संबंधित व्यवस्था देखती है।
बाजार में केरोसिन की बिक्री पर उठे सवाल, जांच की जरूरत…..
शहर के विभिन्न बाजार क्षेत्रों में केरोसिन तेल की कथित बिक्री को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि यदि बाजार में केरोसिन उपलब्ध है, तो इसकी आपूर्ति किस माध्यम से हो रही है और क्या विक्रेताओं के पास इसे बेचने की वैध अनुमति है?केरोसिन की उपलब्धता और वितरण को लेकर केंद्र सरकार ने अप्रैल 2026 में राज्यों को नियमित आवंटन के अतिरिक्त 48 हजार किलोलीटर केरोसिन का आवंटन किया था। वहीं, झारखंड में पीडीएस व्यवस्था के तहत खाद्यान्न एवं अन्य वस्तुओं के वितरण की निगरानी जिला स्तर पर की जाती है। ऐसे में जमशेदपुर के बाजारों में यदि खुले तौर पर केरोसिन की बिक्री हो रही है, तो जिला आपूर्ति विभाग के स्तर से इसकी जांच जरूरी है। जांच के दौरान यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित दुकानदार के पास आवश्यक अनुमति है या नहीं, तेल का स्रोत क्या है, स्टॉक का रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं और बिक्री निर्धारित नियमों के अनुरूप हो रही है या नहीं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को इस मामले में औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि यदि बिक्री वैध है तो उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी मिले और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जा सके।अब सवाल यह है कि जमशेदपुर के बाजारों में बिक रहा केरोसिन आखिर आ कहां से रहा है? इसका जवाब जिला आपूर्ति विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
