जमशेदपुर शहर के वेश्यावृत्ति बाजार का किंगपिन संजय सिंह ने बेटे की शादी साल 2024 में युनाइटेड क्लब में की, मगर कैटरर का भुगतान आज तक नहीं…..
होटल ग्रैंड में वेश्यावृत्ति का मामला हो, या 77 टैंक रोड, साकची की प्रापर्टी हड़पने का मामला हो या फिर बेटे की शादी का ही मामला क्युं ना हो, अधिवक्ता संजय सिंह का दोहरा चरित्र हर जगह नजर आता है।बेटे की शादी आलीशान जगह पर, मेहमानों की खातिरदारी में लाखों खर्च होने की चर्चा, लेकिन मेहनत करने वाले कैटरर के कथित बकाये ने खड़े किए कई सवाल…..👇👇
जमशेदपुर।
बेटे की शादी को यादगार बनाने के लिए आलीशान जगह का चयन, शानदार सजावट, भव्य इंतजाम और मेहमानों के स्वागत में कोई कमी नहीं—शादी समारोह की चकाचौंध देखकर हर कोई आयोजन की भव्यता की चर्चा करता रहा। लेकिन अब इसी शादी से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे आयोजन के तौर-तरीकों और सामाजिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया जा रहा है कि शादी समारोह में कैटरिंग की जिम्मेदारी संभालने वाले कृष्णा कैटरर को उसकी सेवाओं का पूरा भुगतान नहीं किए जाने का आरोप है।
जिस व्यक्ति और उसकी टीम ने शादी में आने वाले मेहमानों के लिए भोजन तैयार करने से लेकर उन्हें परोसने तक की जिम्मेदारी निभाई, उसी के मेहनताने को लेकर कथित तौर पर विवाद सामने आया है।एक तरफ दिखावा, दूसरी तरफ मेहनताने का सवाल।शादी-ब्याह में लोग अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा और मेहमानों की सुविधा के लिए अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करते हैं। आलीशान आयोजन करना किसी के लिए व्यक्तिगत पसंद हो सकती है, लेकिन आयोजन में काम करने वाले कर्मचारियों, कैटररों और अन्य सेवा प्रदाताओं का भुगतान समय पर करना भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
यही वजह है कि यदि कैटरर के भुगतान से जुड़ी शिकायत सही साबित होती है, तो मामला केवल बकाया राशि तक सीमित नहीं रहेगा। यह इस बात पर भी सवाल खड़ा करेगा कि आखिर दिखावे और प्रतिष्ठा के लिए खर्च करने में उदारता दिखाई जा सकती है, तो मेहनत करने वाले व्यक्ति के हक का भुगतान करने में परेशानी क्यों?मेहनत करने वालों के सम्मान का सवाल….किसी भी शादी समारोह की सफलता के पीछे केवल परिवार और मेहमान ही नहीं होते। सजावट से लेकर खानपान, सफाई, बिजली, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं में दर्जनों लोग दिन-रात मेहनत करते हैं।
कैटरिंग स्टाफ भी उन्हीं मेहनतकश लोगों में शामिल है, जो समारोह के दौरान लगातार काम करता है ताकि मेहमानों को किसी तरह की परेशानी न हो।ऐसे में उनकी मेहनत का उचित भुगतान करना केवल व्यावसायिक लेन-देन नहीं, बल्कि उनके श्रम के सम्मान से भी जुड़ा हुआ है।अब उठ रहे हैं कई सवालक्या शादी की भव्यता केवल आलीशान स्थान और महंगी सजावट से तय होती है? क्या मेहमानों के सामने प्रतिष्ठा बनाए रखना ही सबसे बड़ी प्राथमिकता है? या फिर उस आयोजन को सफल बनाने वाले छोटे-बड़े हर व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान करना भी उतना ही जरूरी है?
SPY POST का सवाल सीधा है—
शादी की चकाचौंध बड़ी या मेहनत करने वाले का हक?
यदि कैटरर के भुगतान का आरोप सही है, तो यह मामला समाज के सामने एक बड़ा संदेश भी रखता है कि प्रतिष्ठा दिखावे से नहीं, बल्कि अपने साथ काम करने वाले लोगों के सम्मान और उनके अधिकारों का भुगतान समय पर करने से बनती है।

नोट: अधिवक्ता संजय सिंह और कैटरर कृष्णा के बीच बकाए पैसे को लेकर हुई बातचीत की रिकार्डिंग SPY POST के यु ट्यूब चैनल पर उपलब्ध है।
