जमशेदपुर 𝘾. 𝙊. का कार्यालय—-
𝘾𝙄𝙍𝘾𝙇𝙀 𝙊𝙁𝙁𝙄𝘾𝙀 या 𝘾𝙐𝙍𝙍𝙐𝙋𝙏𝙄𝙊𝙉 𝙊𝙁𝙁𝙄𝘾𝙀….
जमशेदपुर अंचल अधिकारी की कार्यालय की गतिविधि संदेह के घेरे में है। सूत्रों ने बताया कि वहां आम जनता का कोई भी काम बगैर चढ़ावे के पूरा नहीं होता।
𝘾. 𝙊. यानी कि सर्किल ऑफिसर यानी कि अंचल अधिकारी— सरकार द्वारा संचालित इस विभाग में बैठे कर्मचारियों का कार्य है सरकार द्वारा लागू मापदंडों को तत्परता से लागू करवाना। अंचल अधिकारी का काम है अपने क्षेत्र के एक एक इंच जमीन के बारे में पूरी जानकारी रखना और उससे संबंधित विवादों का कानून के दायरे में रहकर निपटारा करना ।
परंतु जब बिल्ली को ही दूध की रखवाली की जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी तो दूध की हिफाजत भगवान भरोसे ही होगी। जमशेदपुर के बिरसानगर में स्थित हुरलुंग क्षेत्र में “आस्था कंस्ट्रक्शन” के द्वारा “आस्था ट्विन सिटी” के नाम से एक आवासीय परिसर का निर्माण हो रहा है। इस परिसर में रजिस्टर्ड जमीन पर सरकारी जमीन का अनुपात 60: 40 का है । ऐसा वहां काम कर रहे बिल्डर के करीबियों ने नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर बताया है और उसे पूरे परिसर का नक्शा एक्सक्लूसिव रूप से स्पाई पोस्ट को उपलब्ध करवाया है। जिसे स्पाई पोस्ट विशेष रूप से अपने पाठकों के लिए प्रकाशित कर रहा है । उसी परिसर को जोड़ते हुए कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप बालमुचू के सांसद निधि से निर्मित सार्वजनिक सड़क गुजरती थी। उस सड़क से संबंधित सारी सूचना ,सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध कराई गई है। उस विवरण के आधार पर यह प्रमाणित होता है कि उस सड़क का निर्माण तत्कालीन राज्यसभा सांसद प्रदीप बालमुचु द्वारा कराया गया था।
परंतु राजनीतिज्ञ प्रदीप बालमुचू, बिल्डर कौशल सिंह और जमशेदपुर अंचल कार्यालय की मिली भगत से इस पूरी की पूरी सड़क की चोरी कर ली गई और इसके एवज में बिल्डर द्वारा राजनीतिज्ञ प्रदीप बालमुचू और अंचल कार्यालय के बीच कैसा आर्थिक और व्यापारिक लेनदेन हुआ इसकी जांच सीबीआई या परिवर्तन निदेशालय को करनी चाहिए।
इस सड़क की चोरी बिल्डर द्वारा किए जाने की खबर पत्रकारों द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद भी तत्कालीन राज्यसभा सांसद प्रदीप बालमुच ने किसी भी तरह की प्रतिक्रिया देने से साफ इनकार कर दिया और तत्कालीन अंचल अधिकारी ने इस विषय पर जानकारी मांगने गए पत्रकार से अपने कार्यालय में जमकर बदतमीजी की।
उस घटना का वीडियो भी खूब वायरल हुआ था । इतना होने के बाद भी और तमाम पुख्ता प्रमाण होने के बाद भी 𝘾. 𝙊. कार्यालय द्वारा इस मामले को दबाने का और लीपापोती करने का प्रयास किया गया और उस कथित बिल्डर के कब्जे से उस अतिक्रमित सड़क को मुक्त करने का कोई भी प्रयास नहीं किया गया।
झारखंड के माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी इस मामले में स्वत संज्ञान लेने की आवश्यकता है और साथ ही साथ संसद की लोक लेखा समिति को इस मामले में दखल देकर इस गुप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की घोर आवश्यकता है, ताकि सरकारी पद का रौब और दुरुपयोग कर कोई भी संसद या सीओ, भ्रष्टाचार के इस बेल को और पनपने में अपना योगदान ना दे सके।
अगली कड़ी में एक और खुलासा……
क्रमशः……





