पार्किंग के नाम पर मानगो बस स्टैंड से 𝙅𝙉𝘼𝘾 कर रहा अवैध वसूली…
17 महीनों से पार्किंग का टेंडर नहीं, करोड़ों रुपए के सरकारी राजस्व की चोरी…
नमक का दरोगा कहानी में लेखक मुंशी प्रेमचंद ने लिखा है— ” बंशीधर के पिता ने अपने बेटे को समझाते हुए कहा था की नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर का मजार है।
निगाह चादर और चढ़ावे पर रखनी चाहिए ।मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चांद है, जो एक दिन दिखाई देता है और घटते घटते लुप्त हो जाता है। ऊपरी आय बहता हुआ स्रोत है जिससे सदैव प्यास बुझती है। वेतन मनुष्य देता है ,इसी से इसमें वृद्धि नहीं होती है।
मशहूर कहानीकार मुंशी प्रेमचंद ने अपनी मशहूर कहानी “नमक का दरोगा” में यह बातें कही हैं। मुंशी प्रेमचंद की बातों को 𝙅𝙉𝘼𝘾 ने आत्मसात कर लिया है, और उनसे प्रेरित होकर सारे कदम उठा रहा है।
जमशेदपुर शहर में पार्किंग का ठेका देने का काम जेएनएसी करती है, परंतु वर्तमान में साकची स्थित बसंत टॉकीज के सामने स्थित पार्किंग को छोड़कर शहर में कहीं भी पार्किंग का टेन्डर नहीं है। पिछले डेढ़ सालों से करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि अब तक हो चुकी है। उपायुक्त महोदय और अनुमंडल पदाधिकारी महोदया की खामोशी आश्चर्य चकित करती है। डिपार्टमेंटल पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली का खेल जेएनएसी द्वारा दिनदहाड़े किया जा रहा है।
पूरे शहर की बात छोड़ दी जाए तो केवल मानगो बस स्टैंड पार्किंग से ही अवैध वसूली के करोड़ों रुपए जेएनएसी के अधिकारी डकार गए(सुत्रों ने बताया)।
कई सालों से डिपार्टमेंटल पार्किंग के नाम पर कभी होमगार्ड के जवान द्वारा तो कभी जेएनएसी के चपरासी द्वारा मानगो बस स्टैंड से डिपार्टमेंटल पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली जारी है। वास्तविक रकम कितनी है इसका हिसाब देने वाला कोई नहीं है।
सरकारी बस स्टैंड होते हुए बस स्टैंड पर निजी बस मालिकों का वर्चस्व है और इसके एवज में जेएनएसी निजी बस संचालकों द्वारा दी जाने वाली “लड्डू” खाकर मदमस्त है। उपायुक्त महोदय और अनुमंडल पदाधिकारी महोदया को अविलंब इस विषय पर एक जांच कमेटी बैठाकर इसकी जांच करवानी चाहिए। अन्यथा महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की कहानी नमक का दरोगा में बंशीधर को उसके पिता की सलाह को जेएनएसी अपना मूल मंत्र मानकर अवैध वसूली का गोरखधंधा जारी रखेगा।



