पूर्वी सिंहभूम जिले में अवैध नर्सिंग होम्स एवं अस्पतालों का फैला है जाल, विभागीय मिली भगत से चल रहे हैं अवैध रेडियोलॉजी सेंटर्स, इसी कारण घाटशिला और पटमदा सहित कई क्षेत्रों में लिंगानुपात की स्थिति शर्मनाक…..
जिले में विभागीय मिली भगत से स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण हो चुका है। सूत्रों ने बताया कि सिविल सर्जन कार्यालय जमशेदपुर से क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 के तहत लगभग 70 नर्सिंग होम और हॉस्पिटल रजिस्टर्ड यानी कि लाइसेंसी हैं ।
परंतु वर्तमान में कुकुरमुत्ता की तरह उग आए और विभागीय सांठगांठ के नाजायज कोख से जन्मे ढाई सौ से ज्यादा नर्सिंग होम, अस्पताल और रेडियोलॉजी सेंटर सक्रिय हैं ।
सवाल यह है कि बिना रजिस्ट्रेशन ऐसे स्वास्थ्य केंद्र किसकी अनुमति से फल फूल रहे हैं ?
माननीय झारखंड उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता राजीव रंजन द्वारा दाखिल पीआईएल पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ की लताड़ के बावजूद जिला स्वास्थ्य विभाग इतना ढीठ हो चुका है कि उसे इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा।
कोढ़ पर खाज की स्थिति यह है कि बरसाती घास की तरह उग आए ऐसे नाजायज स्वास्थ्य केन्द्रों की कारस्तानी की वजह से अब तो कई क्षेत्रों में पुरुष और महिला लिंगानुपात भी चिंताजनक हालत में पहुंच गया है।
घाटशिला और पटमदा में लिंगानुपात क्रमशः 867/1000 और 864/1000 है।
सुत्रों ने बताया कि इन स्वास्थ्य केंद्रों में इन नाजायज रेडियोलॉजी सेंटर्स में खुलेआम लिंग परीक्षण को अंजाम दिया जा रहा है। लिंग परीक्षण के उपरांत अवांछित भ्रुण के गर्भपात की व्यवस्था ने एक बाजार का रूप ले लिया है।
उपायुक्त महोदय को स्वयं कमान अपने हाथों में लेकर इस पूरे “कत्लतंत्र” की बेहतर तरीके से जांच करनी होगी।
उपायुक्त महोदय के साथ मीटिंग में बैठने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को रडार पर रखकर सूक्ष्म जांच होनी चाहिए। स्थिति अगर ऐसी ही रही तो घाटशिला और पटमदा ही नहीं, पूरे जिले में लिंगानुपात चिंताजनक स्थिति में पहुंच सकता है।
नोट- तस्वीर अवैध रूप से चल रहे लिटिल हार्ट नर्सिंग होम की है और इंसेट में इसके संचालनकर्ता मानिक मलिक की तस्वीर है।
विशेष- ऐसे और भी अनैतिक कार्य करने वाले नर्सिंग होम्स की सूची जल्दी प्रकाशित करेंगे। अगली खबर घाटशिला से…..

