IAF की फ्लीट, और वीवीआईपी विमानों का इस्तेमाल क्या हवाई आपदा प्रबन्धन में नहीं हो सकता था?
एविएशन इंडस्ट्री के इतिहास ने इसे आपदा ही समझा जायेगा. इस समस्या का हल सरकार भी चाहती, तो निकाल सकती थी. सरकार की पहली प्राथमिकता यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाना होता। ऐसी स्थिति में भारतीय वायु सेना (IAF) आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, और इसके विमानों (जैसे C-17 ग्लोबमास्टर, C-130J सुपर हरक्यूलिस, और हेलीकॉप्टर) का इस्तेमाल राहत सामग्री पहुँचाने, बचाव कार्यों, चिकित्सा निकासी और दूरदराज के इलाकों तक पहुँचने के लिए किया जाता है, खासकर बाढ़, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान। इन्हें इस काम के लिए क्यों नहीं लगाया जा सकता था? एक और विकल्प , सरकार दूसरी विमान कंपनियों की सेवाएं ले सकती थीं.
देश के प्रधानमंत्री यदि खुद को प्रधानसेवक बोलते हैं, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को अब ‘सेवा तीर्थ’ के नाम से लोग जानने लगें, तो सेवा का इससे सुनहरा मौक़ा कहाँ मिलेगा? जो वीवीआईपी विमान हैंगर में खड़े हैं, दो-तीन दिन उसे हवाई अड्डों पर फंसे यात्रियों को उनके गंतव्य या उसके पास के ठिकानों पर पहुंचाने में किया जा सकता था. यात्रियों को उनके ठिकानों तक पहुंचाने में जो भी खर्चा लगता, सरकार उसे जुर्माना समेत इंडिगो से वसूलती.
एयर इंडिया वन की फ़्लाइट्स में, प्रेसिडेंट को VIP-1, वाइस प्रेसिडेंट को VIP-2 और प्राइम मिनिस्टर को VIP-3 कहा जाता है। VIP 1, 2, और 3 के लिए एयरक्राफ्ट में एक एग्जीक्यूटिव एनक्लोजर होता है जिसमें एक ऑफिस और एक बेडरूम होता है। एयर इंडिया वन के बाकी सभी पैसेंजर्स को हर समय कलर-कोडेड आइडेंटिटी कार्ड पहनने होते हैं।
इंडियन एयर फ़ोर्स के पास छह बोइंग 737 (बिज़नेस बोइंग जेट्स (BBJ)) का फ़्लीट है। VIPs की डोमेस्टिक और इंटरनेशनल यात्रा के लिए तीन नेम्ड और तीन अननेम्ड हैं।
K5012 : 36106 – राजदूत
K5013 : 36107 – राजहंस
K5014 : 36108 – राजकमल
K2412 : MSN 23036
K2413 : MSN 23037
K3187 : MSN 20483
राजदूत का इस्तेमाल प्राइम मिनिस्टर करते हैं और बाकी दो राजकमल और राजहंस का इस्तेमाल प्रेसिडेंट और वाइस-प्रेसिडेंट करते हैं। इनके अलावा, IAF के पास चार VIP एम्ब्रेयर लेगेसी 600 हैं जिनका इस्तेमाल भारत के गृह, वित्त, रक्षा और विदेश मंत्री करते हैं।
दरअसल, यह सबकुछ मोदी सरकार की इच्छाशक्ति पर निर्भर था. जब विमान यात्री संकट शुरू हुआ, उस समय सरकार का सारा अमला पुतिन के साथ आये डेलिगेशन के ख़ैर मक़दम में लगा हुआ था. पुतिन और उनके प्रतिनिधिमंडल के स्वागत में कोई कमी न रह जाये , इसकी चिंता मोदी सरकार को ज़्यादा थी, दूसरी तरफ देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर कोहराम मचा हुआ था.



