आज भी समाज मे नेताओं के चुनावी घोषणा मे नाली, पानी और स्ट्रीट लाइट प्रमुख मुद्दे है।
हम आहत हैं कि देश को आज़ादी मिले हुए लगभग 75 वर्ष बीत गए, वहीं झारखंड अलग राज्य बने 25 वर्ष, लेकिन जनता को मूल भूत सुविधा मुहैया नही हो सकी।
सरकार लगातार इन योजनाओं पर हज़ारों करोड़ रुपए जनता कि गाढ़ी कमाई की खर्च कर चुकी है। आखिर ये रुपए कहां खर्च किया गया?
नाली पानी के नाम पर खर्च हुए रुपए कहा चला गया? किस किस ने अपनी तिजोरी भरी? यह जांच ,का और कार्रवाई का विषय है। पिछले 75 वर्षों मे इन योजनाओ पर आवंटन तो होता रहा, लेकिन काम के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती आ रही है। क्या नगर निकाय चुनाव के बाद यह तस्वीर बदलेगी?
हमारे हिसाब से बिल्कुल नही। हां इतना जरूर होगा कि विशेष पदाधिकारी का हिस्सा समाज मे पनप रहे छोटे नेताओं मे बंटेगा।
अब एक व्यक्ति अरबपति नही होगा बल्कि सैक्डो करोड़पति बनेंगे,अगर जनता का यही हाल रहा।
जनता जनार्दन ही भ्रष्टाचार की जननी है। अगर जनता चुप है तो नाली पानी का यह मुद्दा आज़ादी के 150 वर्षो के बाद भी चुनावी मुद्दा बना रहेगा।
जनता जनार्दन भ्रष्ट अधिकारियों का मुह काला कर गधे पर बैठाना और जूते की माला पहनाना भूल चुकी है। यही बड़ा कारण है कि अधिकारी बहक चुके है। जनता जागेगी तो सरकार को जागना ही पड़ेगा।


