पत्नी ने पति पर लगाया नंपुसंक होने का आरोप, न्यायालय ने पति के मेडिकल जांच रिपोर्ट को माना सही और खारिज किया भरण पोषण के रूप में हर्जाना का मामला…..
कुटुंब न्यायालय सरायकेला के न्यायाधीश श्री वीरेश कुमार ने दिनांक 29/ 8 /2026 के एक निर्णय में पत्नी के भरण पोषण के आवेदन को रद्द कर दिया। इस केस की पृष्ठभूमि यह थी कि 28/ 4 /2022 को सरायकेला में हिंदू रीति रिवाज के साथ पति पत्नी का विवाह हुआ था। पत्नी ने यह आरोप पति पर लगाया था कि वह नपुंसक है और उसने उसके साथ घरेलू हिंसा व प्रताड़ना की है। इस आरोप के आधार में 22/10/2022 को पत्नी ने पति के घर को छोड़कर अपने मायके में आश्रय ले लिया। इस भरण पोषण के वाद में पत्नी की ओर से तीन गवाहों ने गवाही दी थी और पति की ओर से दो गवाह ने गवाही दी थी।
पति सरकारी शिक्षक है। इसमें पति ने अपनी जांच डॉक्टर से कराई थी जिसमें डॉक्टर ने यह प्रमाणित किया था की पति पूर्णतः शारीरिक तौर पर स्वस्थ है और साथ ही पति ने पत्नी की वापसी के लिए विवाह के पुनर्स्थापना के लिए एक वाद कुटुंब न्यायालय सरायकेला में ही दाखिल किया था जिसमें पति को पत्नी के विरुद्ध डिक्री प्राप्त हुई थी। इस वाद में पति ने डॉक्टर की रिपोर्ट भी न्यायालय में साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत की थी। इस वाद में पति की ओर से अधिवक्ता प्रभात कुमार ने पैरवी की थी, जबकि बहस अधिवक्ता अमित कुमार सिंह ने की थी। अधिवक्ता अमित कुमार सिंह ने लिखित बहस के साथ न्यायालय में उच्च एवं उच्चतम न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला दिया था। जिन्हें ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने पति के पक्ष में पत्नी के भरण पोषण के वाद को रद्द कर दिया।

