ब्रह्मनंद नारायणा अस्पताल में पहली बार ऑर्बिटल अथरेक्टोमी हृदय स्वास्थ्य की शुरुआती जांच की आवश्यकता पर जोर देने की शुरुआत की गई….

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ब्रह्मनंद नारायणा अस्पताल में पहली बार ऑर्बिटल अथरेक्टोमी हृदय स्वास्थ्य की शुरुआती जांच की आवश्यकता पर जोर देने की शुरुआत की गई….
जमशेदपुर 21 अगस्त 2025 क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण चिकित्सीय उपलब्धि के रूप में ब्रह्मनंद नारायणा अस्पताल जमशेदपुर में पहली बार ऑर्बिटल अथरेक्टोमी प्रक्रिया सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। यह न्यूनतम इनवेसिव तकनीक है जिसका उपयोग गंभीर रूप से कैलशिफाइड कोरोनरी आर्टरी डिजीज के उपचार में किया जाता है। इस प्रक्रिया से 74 वर्षीय मरीज को राहत मिली जो 3 वर्षों से सीने के दर्द से जूझ रहे थे। मरीज जिनका 2012 में सबड्युरल हेमेटोमा का ऑपरेशन हुआ था, उन्हें परिश्रम करने पर सीने में दर्द होता था।
लेकिन बेहोशी या सूजन का कोई इतिहास नहीं था। कार्डियक जांच, इसीजी और ईको कार्डियोग्राफी के बाद कोरोनरी एंजियोग्राफी की गई जिसमें गंभीर कैलशिफिकेशन सामने आया जिससे पारंपरिक एंजियोप्लास्टी करना कठिन हो गया।
वरिष्ठ इंटरनेशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर अखलाक अहमद ने बताया गंभीर कैलशिफाइड कोरोनरी आर्टरी में सामान्य बैलून ब्लॉकेज को प्रभावित ढंग से खोल नहीं पाते। ऑर्बिटल एथेरेक्टोमी हमें सटीक रूप से कैलशिफाइड ब्लॉक को हटाने की सुविधा देती है, जिससे स्टेंट सफलतापूर्वक डाला जा सके। ऐसी बीमारियों का समय पर पता लगना बहुत जरूरी है।
क्योंकि देर होने पर उपचार के विकल्प सीमित हो जाते हैं। इस प्रक्रिया में प्रभावित आर्टरी में एक पतली कैथेटर डाली जाती है जिसमें डायमंड कोटेड बर्र उच्च गति से घूम कर कठोर प्लांक को तोड़ता है। इसके बाद बैलून एंजियोप्लास्टी और स्टेंट डाला जाता है, जिससे रक्त प्रवाह बहाल होता है।
यह पद्धति कई उच्च जोखिम वाले मरीजों में ओपन हॉर्ट सर्जरी की आवश्यकता को टाल देती है। रिकवरी के बाद मरीज ने कहा मैं सालों से सीने की असुविधा को अनदेखा कर रहा था। सोचता था यह बस बुढ़ापे का असर है।
अगर मैं पहले आ जाता तो शायद इतने वर्षों की परेशानी से बच सकता था। टीम का आभारी हूं कि बिना बड़ी सर्जरी के इलाज हो गया। अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर श्री ए धर्मा राव ने कहा यह उपलब्धि दर्शाती है की उन्नत इंटरनेशनल कार्डियोलॉजी कैसे उन मरीजों के लिए भी उपचार के अवसर खोल सकती है जिन्हें पहले असंभव माना जाता था।
यह हमारे संकल्प को मजबूत करता है कि हम क्षेत्र में ही अत्याधुनिक प्रक्रियाएं उपलब्ध करवाएं।
अध्ययनों के अनुसार लगभग एक तिहाई कोरोनरी एंजियोप्लास्टी मरीजों में गंभीर कैलशिफिकेशन होता है, लेकिन केवल 10% को ही ऑर्बिटल एथेरेक्टोमी की आवश्यकता पड़ती है। यही वजह है कि यह प्रक्रिया दुर्लभ होते हुए भी चुनिंदा मामलों में अत्यंत मूल्यवान है। मरीज को प्रक्रिया के 2 दिन बाद ही छुट्टी दे दी गई। जो दर्शाता है कि न्यूनतम इनवेसिव तकनीक से रिकवरी का समय और परिणाम कितने बेहतर हो सकते हैं।
यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि 60 वर्ष से ऊपर के लोगों या लगातार लक्षण झेल रहे व्यक्तियों के लिए निवारक कार्डियक स्क्रीनिंग जीवन रक्षक साबित हो सकती है।

ब्रह्मनंद नारायण अस्पताल जमशेदपुर के बारे में….

ब्रह्मनंद नारायण अस्पताल एक 150 बेड वाला एनएबीएच मान्यता प्राप्त मल्टी स्पेशलिटी तृतीय अस्पताल है, जिसकी स्थापना 2008 में हुई थी।
यहां पांच अत्यधिक ऑपरेशन थिएटर और 24 * 7 कैथ लैब उपलब्ध है, जिससे झारखंड, बिहार ,उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के मरीजों को विश्व स्तरीय चिकित्सा सुविधा मिलती है।
यह अस्पताल कार्डियक सर्जरी, कार्डियोलॉजी पेडियाट्रिक, कार्डियोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट, न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलॉजी ऑंकोलॉजी नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी, जनरल एवं लेप्रोस्कोपी सर्जरी, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी ,गायनेकोलॉजी, चेस्ट मेडिसिन और ट्रॉमा केयर जैसी क्षेत्र में उत्कृष्ट का केंद्र है साथ ही यहां 24 घंटे डायलिसिस सेवाएं भी उपलब्ध है।

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