पोस्ट ऑफिस के ब्रांचेज बढ़ा लीजिए, चिट्ठी लिखने और पोस्ट करने का समय आनेवाले हैं।

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पोस्ट ऑफिस के ब्रांचेज बढ़ा लीजिए। चिट्ठी लिखने और पोस्ट करने का समय आनेवाले हैं। विकल्प खराब नहीं। भारत एक पल में ख़त्म हो सकता है, बिना मिसाइल डाले। ऐसा होगा नहीं, लेकिन मान लीजिए अगर अमेरिका ने टेक (Tech) खींच लिया तो सोचिए क्या होगा? सिर्फ यूट्यूब बंद किया तो भारत में पंद्रह करोड़ लोग और बेरोजगार हो जायेंगें। गूगल, अमेजॉन जैसे और कम्युनिकेशन के बड़े सेटेलाइट सेवा ठप पड़ जाएंगे, तो क्या होगा? जो विदेशों में भारतीय हैं वे कैदी बन जाएंगे। क्योंकि ग्लोबली संचार/कम्युनिकेशन के माध्यम पर हमारा कुछ भी अख्तियार नहीं। ठीक है अमेरिका को भी नुकसान होगा। क्योंकि हम भीड़ हैं उनका कंज्यूमर है। लेकिन उसका कोई खास नुकसान नहीं होगा। हां ऐसी स्थिति में चीन और शक्तिशाली होगा।

हम क्या होंगे? और क्या करेंगे? हम ऐसी स्थिति में आग लगे कुआं खोदेंगे। और हम कर भी क्या सकते है? हम तो तीस वर्ष पीछे चले जाएंगे। इस से ज्यादा कुछ न होगा। इसी को कहते है अब तक विज़न लॉस कंट्री, विजन लॉस पॉलिटिक्स, विज़न लॉस लीडर्स।

भारत का पढ़ा-लिखा युवा आज अपना भविष्य भारत में नहीं ढूंढता। ना वह भारत के लिए सपने देखता है। न यहां पर उसकी दिमाग की ख़पत है। और न यहां अमेरिका, यूरोप वाली जीवन शैली को देख पाता है। टैलेंटेड युवाओं की आंखे अमेरिका, कनाडा, चमचमाते दुबई और यूरोप पर है। अच्छी जीवन शैली, बेहतर आबो- हवा के लिए, वह मर जी कर भी वह बाहर जाना चाहता हैं। समय बहुत तेजी से बदला है। अमेरिका अगर बदले की भावना से काम करे तो हमारा AI भी नहीं। जिन पर हमारा डिफेंस निर्भर हो रहा है।

राजनीतिक परिदृश्य बदलते देर नहीं लगती। कमज़ोर कौन और ताकतवर कौन? इसको समझना और इसकी व्याख्या कठिन नहीं। दुनिया का दृश्य स्पष्ट होता जा रहा है। फिर भी हम कोई सूत्र न पकड़ पा रहे हैं। राजनीतिक अस्थिरता लागू है। एक तरह से कोल्ड वर्ल्ड वॉर-3 शुरू है। जिनके पास आंखे हैं वो देख सकेंगे। अच्छा है अमेरिका के इस व्यवहार पर मोदी जी कुछ बोल नहीं रहे। अन्यथा कई अन्य बातें बिगड़ सकती है।

इसलिए महाशय, सिर्फ चीन इस दुनिया में आत्मनिर्भर देश है। जिसके पास अपना सबकुछ है। आज चीन और जापान किसी भी देश पर आश्रित नहीं।
यह साफ समझ जाईए, नेताओं और आम जनता की दृष्टि में जब तक दूरी रहेगी , दिनचर्या में दूरी रहेगी, लोग नेताओं का पूजन करते रहेंगे। नेता सरकारी भोजन, बंगले में ऐश करेंगे तब तक यह देश कमजोर रहेगा। ऐसा क्यों है? ज्यादातर 90% नेता अनपढ़ और क्रप्ट हैं। उनके पास कोई विज़न नहीं। और 10% पढ़े-लिखे नेता वह भी बड़े लुटेरे। इस देश में एक चपरासी, एक ठुल्ला पुलिस तक रिश्वतखोर है। कोई सरकारी विभाग करप्शन से अछूता नहीं। हम उठें तो कैसे?
ईमानदारी हम लाएं तो कहां से लाएं? निर्माण करें तो कैसे? हमारे नेता तो नली-नाले की रिपेयरिंग से ऊपर नहीं उठे। आज सभी देश अपने-अपने पाले बदल रहें हैं। कूटनीतिक युद्ध में आपको अपनी धरती टटोलनी है। अपनी कमजोरी अपनी ताक़त को परखनी हैं। कौन कहां , कैसे बदल गया ये मत सोचो। बस देखो उनके सामने हम कहां हैं? और हम इतना विवश क्यों हैं? विकल्प पार्टियां नहीं। हम हैं। अगर मईया योजना, बाहिनी योजना, बिजली फ्री आपके विकल्प हैं। तो आपके बच्चों के भविष्य का इस देश में कोई विकल्प नहीं।

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