प्रश्न –क्या पुलिस की केस डायरी देख सकते हैं?
उत्तर — इसका उत्तर थोड़ा परिस्थिति पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं 👇
🔹 सामान्य नियम:–
पुलिस केस डायरी (Case Diary) एक गोपनीय दस्तावेज़ होती है, जिसे CrPC की धारा 172 (Section 172 CrPC) के अंतर्गत रखा जाता है।
यह पुलिस द्वारा जांच के दौरान बनाई जाती है और इसमें हर दिन की कार्यवाही, बयानों का सार, जांच की दिशा आदि दर्ज होते हैं।
🔹 कौन देख सकता है:
- मजिस्ट्रेट या जज —
न्यायालय केस डायरी को देख सकता है, ताकि जांच की प्रगति समझ सके, परंतु इसे सबूत के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। - अभियोजन (Prosecution) —
सरकारी वकील (APP/PP) केस डायरी की मदद लेकर कोर्ट में दलीलें रख सकता है। - अभियुक्त (Accused) या बचाव पक्ष —
आम तौर पर केस डायरी को देखने या उसकी प्रति प्राप्त करने का अधिकार नहीं होता।
लेकिन यदि पुलिस ने केस डायरी का कोई अंश कोर्ट में उपयोग किया है (उदाहरण के लिए किसी गवाह को टकराने के लिए), तो उस सीमा तक बचाव पक्ष को देखने का अधिकार मिल सकता है।
🔹 संबंधित कानून:
CrPC Section 172(3):
“No police officer shall be compelled to produce the case diary nor shall any accused person or his agent be entitled to call for such diaries or to see them except as provided in sub-section (2).”
🔹 अपवाद (Exception):
अगर कोर्ट यह महसूस करे कि न्याय के हित में केस डायरी देखना आवश्यक है, तो वह अनुमति दे सकता है — लेकिन सीमित दायरे में।



