आज जिस लालू यादव को भाजपा विरोध का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता है, उन्हीं लालू यादव की मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी भाजपा के समर्थन से हुई थी।
सियासत में कब कौन दोस्त बन जाए, कब कौन दुश्मन कहा नहीं जा सकता।
10 मार्च 1990 को 46 साल की आयु में लालू प्रसाद ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
दरअसल छात्र राजनीति से घिसकर राष्ट्रीय राजनीतिक हल्कों में चमकने वाले लालू प्रसाद यादव शुरू से ही मौके को भांपने में माहिर रहे हैं।
1990 में मुख्यमंत्री चुनने के समय प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की पहली पसंद राम सुंदर दास थे। इस समय दिग्गज नेता चंद्रशेखर, विश्वनाथ प्रताप सिंह से अंदरूनी तौर पर नाराज चल रहे थे।
उनका मानना था की विश्वनाथ प्रताप सिंह ने उन्हें धोखा देकर खुद प्रधानमंत्री की कुर्सी हथिया ली है। दो दिग्गजों के बीच इसी मनमुटाव का फायदा उठाते हुए लालू यादव ने चंद्रशेखर से अपने नजदीकी संपर्क का फायदा उठाते हुए उनसे मदद मांगी।
चंद्रशेखर ने एक नई राजनीतिक चाल चलते हुए तत्कालीन दिग्गज रघुनाथ झा का नाम मुख्यमंत्री के तौर पर उछाल दिया। पहले केवल दो दावेदार मुख्यमंत्री पद के थे, किंतु रघुनाथ झा का नाम आने के बाद तीनों के नाम पर वोटिंग हुई।
जिसमें लालू प्रसाद यादव को सबसे ज्यादा 67 वोट मिले और वह मुख्यमंत्री बन गए। उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने अपना समर्थन दिया था। लालकृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के समय जब बिहार में मुख्यमंत्री की हैसियत से लाल यादव ने आडवाणी की रथ यात्रा को रोका था, उसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने लाल यादव की सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था।
लेकिन यह सच्चाई है, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि लालू यादव को पहली बार बिहार का मुख्यमंत्री बनाने में भारतीय जनता पार्टी की भूमिका रही है।



