बिष्टुपुर स्थित “स्टील सिटी नर्सिंग होम” में मरीजों से वसूला जा रहा अवैध “प्रीचार्ज”, सालाना यह रकम करोड़ों रुपए में…..

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बिष्टुपुर स्थित “स्टील सिटी नर्सिंग होम” में मरीजों से वसूला जा रहा अवैध “प्रीचार्ज”, सालाना यह रकम करोड़ों रुपए में…..

जमशेदपुर शहर की कुल आबादी तकरीबन 25 लाख के करीब है। एमजीएम, सदर अस्पताल जैसे सरकारी व्यवस्थाओं के अलावा टीएमएच, टाटा मोटर्स, टिन प्लेट जैसे कॉर्पोरेट अस्पताल भी हैं।
इसके अतिरिक्त शहर में लगभग 100 की संख्या में नर्सिंग होम भी निजी तौर पर संचालित हो रहे हैं। बिष्टुपुर स्थित यश कमल परिसर में स्टील सिटी नर्सिंग होम शायद सबसे ज्यादा चर्चित है।
शहर के तमाम प्रसिद्ध डॉक्टर या फिर टीएमएच से रिटायर्ड डॉक्टर इसी नर्सिंग होम में प्रैक्टिस करते हुए मिलेंगे।
इस नर्सिंग होम में मरीजों की आवाजाही इस कदर है कि रोजाना 500 से ज्यादा मरीज यहां इलाज करवाने आते हैं।
इन मरीजों को अगर डॉक्टर को दिखाना है तो इस नर्सिंग होम में “प्रीचार्ज” के रूप में पहले ₹70 का रसीद कटवाना अनिवार्य है। इस ₹70 के भुगतान के बाद ही मरीज डॉक्टर को दिखा सकते हैं। इस ₹70 के अलावा मरीज को डॉक्टर या नर्सिंग होम द्वारा निर्धारित फीस का भुगतान करना होता है।
इन दोनों जगह पर पैसे देने के बाद मरीज को यश कमल परिसर के बाहर गाड़ी पार्किंग के लिए अलग से शुल्क देना पड़ता है।
प्रति मरीज के 70 रुपए के भुगतान को अगर आंकड़ों में बदला जाए तो यह रकम करोड़ों में होती है। कुछ इस तरह👇👇
(1)प्रतिदिन 500 मरीजों से 70 रुपए के हिसाब से 70*500=35000 रुपए (2)35000*365=1,27,75000 रुपए
(3)और अगर पिछले 10 वर्षों का आंकड़ा देखा जाए तो 12775000*10=12,77,50,000 रुपए …

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दूसरी बात की मरीज जब डॉक्टर की मुंह मांगी फीस दे रहा है तो यह अतिरिक्त चार्ज कैसा?
इस तरह से मरीजों से पैसे वसूलने का अधिकार इस तरह के नर्सिंग होम या पॉलीक्लिनिक को किसने दिया?
नर्सिंग होम में ही दवा की दुकान भी है जहां बगैर किसी डिस्काउंट के मरीजों को एमआरपी पर दवा उपलब्ध कराई जाती है।
जबकि शहर के बाहर किसी अन्य मेडिकल दुकान से मरीज अगर दवा खरीदता है तो सामान्य तौर पर उसे 10 से लेकर 25% के डिस्काउंट के साथ दवा मिल जाता है।
नर्सिंग होम में ही एक्स-रे, सिटी स्कैन, एमआरआई, ऑपरेशन थिएटर सहित अतिरिक्त सेवाएं संचालित होती है। इनके मनमाने शुल्क पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है।
करोड़ों रुपए की इस अवैध उगाही का हिसाब किताब कौन रखता है ?
क्या नर्सिंग होम के सालाना ऑडिट में इस करोड़ों के रकम की वसूली का कोई जिक्र होता है, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इस नर्सिंग होम को या इस तरह के नर्सिंग होम को इस तरह के अनैतिक वसूली की अनुमति कौन देता है?
क्या सुबे का स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव, आरएलए, जिले के उपायुक्त या सिविल सर्जन के कार्यालय से इस अवैध वसूली की अनुमति दी गई है।
बिष्टुपुर के जिस यशकमल काम्प्लेक्स में यह नर्सिंग होम चल रहा है, उस बिल्डिंग की ही वर्तमान में अनुमानित कीमत 20 करोड रुपए के आसपास है।

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