यह constable का घर है? 😱
उत्तर प्रदेश पुलिस के बर्खास्त कांस्टेबल आलोक प्रताप सिंह की लखनऊ में सुल्तानपुर रोड पर बनी करीब 7,000 वर्ग फुट की आलीशान हवेली (निर्माण लागत 5 करोड़ से ज्यादा) इन दिनों सुर्खियों में है। ED ने 12 दिसंबर 2025 को कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में उनके घर सहित कई जगहों पर छापे मारे।
यह रैकेट सैकड़ों करोड़ (कुछ रिपोर्ट्स में 1000 करोड़ तक) का बताया जा रहा है, जिसमें कोडीन सिरप को नशे के रूप में बेचा जा रहा था और बांग्लादेश-नेपाल तक स्मगलिंग हो रही थी। आलोक प्रताप सिंह को UP STF ने 2 दिसंबर 2025 को गिरफ्तार किया था। वह फर्जी दवा कंपनियां चलाकर इस सिंडिकेट का अहम हिस्सा थे।
लेकिन आलोक की कहानी पुरानी है:
• 2006 में लखनऊ में एक व्यापारी के कर्मचारी से 4-11 किलो सोना लूटने के आरोप में गिरफ्तार हुए, सेवा से बर्खास्त किए गए।
• सबूतों की कमी से कोर्ट ने बरी कर दिया और अदालती आदेश पर उन्हें पूरे लाभ के साथ बहाल कर दिया गया।
• बाद में फिर आरोप लगे, 2019 में दोबारा बर्खास्तगी।
सवाल यह है कि इतनी संपत्ति एक साधारण कांस्टेबल की सैलरी से कैसे बनी? और इतिहास होने के बावजूद सिस्टम ने उन्हें इतनी छूट क्यों दी? कुछ राजनीतिक आरोप भी लग रहे हैं कि गिरफ्तारी के बाद भी नरम रवैया अपनाया जा रहा है।
क्या यह सिस्टम की कमजोरी है या कुछ और?



