साकची में सुबह-सुबह सजता है सब्जी बाजार, वसूली के आरोपों से उठे सवाल, आकाश नाम के गुंडा के द्वारा गरीब सब्जी दुकानदारों से कथित तौर पर की जा रही वसूली को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल, जिम्मेदारी तय करने की मांग…..
जमशेदपुर।
शहर के प्रमुख व्यावसायिक इलाके साकची में बसंत टॉकीज के सामने पार्किंग क्षेत्र में सुबह-सुबह लगने वाली सब्जी दुकानों को लेकर अब कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और कुछ सब्जी दुकानदारों का आरोप है कि पार्किंग की जगह पर दुकानें लगवाने के एवज में गरीब दुकानदारों से कथित रूप से नियमित वसूली की जा रही है।
दुकानदारों का कहना है कि रोजी-रोटी के लिए सुबह से सड़क किनारे या पार्किंग क्षेत्र में सब्जी की दुकान लगाने वाले छोटे कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बनाया जाता है। आरोप है कि उनसे निर्धारित व्यवस्था के नाम पर रकम वसूली जाती है, जबकि इस पूरी प्रक्रिया की वैधता और वसूली की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता नहीं है।
कौन कर रहा है वसूली, किसके आदेश पर?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पार्किंग क्षेत्र में सब्जी दुकानें लग रही हैं तो उन्हें वहां दुकान लगाने की अनुमति किसने दी और दुकानदारों से रकम वसूलने का अधिकार किसके पास है? स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वसूली किसके माध्यम से और किस व्यवस्था के तहत की जा रही है।
प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल
मामला सामने आने के बावजूद स्थानीय लोगों ने प्रशासन और JNAC अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अथवा सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर अनधिकृत रूप से दुकानें लगाकर वसूली की जा रही है, तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। पूरे मामले में प्रशासनिक जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
जांच हुई तो सामने आ सकता है बड़ा खेल…..
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से चल रही इस कथित वसूली की जांच की जाए तो बड़ी रकम के लेन-देन का खुलासा हो सकता है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या पार्किंग स्थल पर लग रही दुकानों और उनसे कथित वसूली की व्यवस्था का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा? और यदि अनियमितता सामने आती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
गरीब सब्जी दुकानदारों का कहना है कि वे किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते, लेकिन रोजी-रोटी के लिए दुकान लगाने के बदले कथित वसूली का बोझ उनके लिए परेशानी का कारण बन रहा है। ऐसे में प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।
नोट- वसुली की यह रकम प्रतिदिन 80,000/- रुपए और महीने का लगभग चौबीस से पच्चीस लाख के आसपास है।

