जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2.0 में दस प्रतिष्ठित पुरस्कारों की स्थापना, प्रत्येक के लिए एक लाख रुपये की सम्मान राशि……

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जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2.0 में दस प्रतिष्ठित पुरस्कारों की स्थापना, प्रत्येक के लिए एक लाख रुपये की सम्मान राशि…..

महान साहित्यकारों, कलाकारों, शिक्षाविदों एवं सांस्कृतिक विभूतियों की स्मृति में स्थापित पुरस्कारों के माध्यम से झारखंड की विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का संकल्प…..

जमशेदपुर, 26 अक्टूबर.

विद्यादीप फाउंडेशन द्वारा आगामी 18 से 20 दिसंबर 2026 तक होटल रमाडा, बिष्टुपुर में आयोजित होने वाले जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF 2.0) में साहित्य, संगीत, चित्रकला, नृत्य, पत्रकारिता, शिक्षा तथा सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए दस प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे. प्रत्येक पुरस्कार के लिए ₹1,00,000 की सम्मान राशि होगी.

कार्यक्रम के क्यूरेटर संदीप मुरारका ने बताया कि गत वर्ष भी देश के विख्यात साहित्यकारों को सम्मानित किया गया था. जिनमें राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, व्योमेश शुक्ल, डॉ. अंजुम शर्मा, बाबुषा कोहली, डॉ. रविदत्त बाजपेई, प्रो. स्वाति पराशर, बनवारी लाल मित्तल, डॉ. मयंक मुरारी एवं अचल प्रियदर्शी शामिल थे.

मुरारका ने कहा, “ये पुरस्कार हमारी ओर से उन महान विभूतियों को विनम्र श्रद्धांजलि हैं, जिन्होंने अपना जीवन साहित्य, कला, शिक्षा और संस्कृति को समर्पित कर दिया. हमारी कोशिश है कि उनकी स्मृति नई पीढ़ी के हृदय में जीवित रहे और झारखंड की माटी की खुशबू देश के कोने-कोने तक पहुँचे.”इस वर्ष फेस्टिवल की केंद्रीय थीम ‘विरासत एवं पर्यटन’ है. पुरस्कारों का नामकरण भारतीय साहित्य, कला, शिक्षा एवं संस्कृति के उन महान व्यक्तित्वों और ऐतिहासिक संस्थाओं की स्मृति में किया गया है, जिनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है.

इन पुरस्कारों के पीछे झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने की विशेष परिकल्पना भी है.वसुंधरा कोमकली पुरस्कार — संगीत एवं संगीत-साहित्यहिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रख्यात गायिका तथा महान संगीतज्ञ पंडित कुमार गंधर्व की जीवनसंगिनी एवं संगीत-साधना की सहयोगी पद्मश्री वसुंधरा कोमकली का जन्म वर्ष 1931 में जमशेदपुर में हुआ था. उनका मूल नाम वसुंधरा श्रीखंडे था. उन्हें पद्मश्री एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया.जमशेदपुर में जन्मी इस महान संगीत साधिका के नाम पर स्थापित पुरस्कार शहर की अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति है. इसका उद्देश्य भारतीय संगीत एवं संगीत-साहित्य में उत्कृष्ट योगदान को प्रतिष्ठित करना है.

जे. स्वामीनाथन पुरस्कार — चित्रकलाजे. स्वामीनाथन आधुनिक भारतीय चित्रकला के महान कलाकार एवं कला चिंतक थे. वर्ष 1982 में भोपाल में स्थापित भारत भवन के ‘रूपंकर’ कला संग्रहालय के विकास में उनकी केंद्रीय भूमिका रही. उन्होंने जनजातीय चित्रकला को आधुनिक कला के समान प्रतिष्ठा दिलाने का प्रयास किया. जनगढ़ सिंह श्याम, पद्मश्री भज्जू श्याम और पद्मश्री भूरी बाई जैसी कई प्रतिभाएं भारत भवन की ही देन हैं.इस पुरस्कार के पीछे हमारी परिकल्पना है कि झारखंड को भी एक जे. स्वामीनाथन मिले, जो यहाँ की पैतकर, सोहराय, कोहबर और जादोपटिया जैसी चित्रकला परंपराओं को विश्वस्तरीय पहचान दिलाए तथा झारखंड में भारत भवन जैसा स्थायी कला केंद्र स्थापित करने का स्वप्न साकार हो.रुक्मिणी देवी अरुंडेल पुरस्कार — नृत्य कलापद्म भूषण रुक्मिणी देवी अरुंडेल भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम के पुनरुत्थान की अग्रणी साधिका थीं.

उन्होंने वर्ष 1936 में चेन्नई में ‘कलाक्षेत्र’ की स्थापना की. वर्ष 1956 में पद्म भूषण, 1957 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार तथा 1967 में अकादमी फेलोशिप से सम्मानित रुक्मिणी देवी वर्ष 1952 में राज्यसभा के लिए मनोनीत होने वाली पहली महिला भी थीं.इस पुरस्कार के पीछे हमारी परिकल्पना है कि जिस प्रकार रुक्मिणी देवी की कला-साधना को राष्ट्रीय सम्मान मिला, उसी प्रकार झारखंड के लोक एवं पारंपरिक कला-साधकों को भी देश के सर्वोच्च मंचों पर प्रतिनिधित्व और सम्मान प्राप्त हो.फादर कामिल बुल्के पुरस्कार — हिंदी साहित्यपद्म भूषण फादर कामिल बुल्के बेल्जियम में जन्मे महान हिंदी विद्वान, रामकथा के शोधकर्ता एवं कोशकार थे.

उन्होंने रांची को अपनी कर्मभूमि बनाया और हिंदी भाषा एवं साहित्य के विकास में जीवन समर्पित किया. उनकी प्रसिद्ध कृति ‘रामकथा : उत्पत्ति और विकास’ तथा ‘अंग्रेज़ी-हिंदी कोश’ हिंदी जगत की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं. वर्ष 1974 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.झारखंड की धरती को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले इस महान हिंदीसेवी के नाम पर स्थापित राष्ट्रीय पुरस्कार का उद्देश्य उत्कृष्ट हिंदी पुस्तकों, मौलिक लेखन और साहित्यिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है.जेराल्ड डरेल पुरस्कार — अंग्रेज़ी पुस्तकजेराल्ड डरेल विश्वप्रसिद्ध ब्रिटिश लेखक, प्रकृतिविद् एवं वन्यजीव संरक्षणविद् थे. उनका जन्म 7 जनवरी 1925 को जमशेदपुर के बेल्डीह स्थित बंगले (डी-6, वर्तमान बंगला नंबर 10) में हुआ था. बचपन में वे इंग्लैंड तथा बाद में यूनान के कोर्फू द्वीप पर रहे, जहाँ प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति उनका गहरा लगाव विकसित हुआ. उनकी प्रसिद्ध पुस्तक ‘My Family and Other Animals’ विश्व साहित्य की चर्चित कृति है. उन्होंने वर्ष 1959 में जर्सी द्वीप पर वन्यजीव संरक्षण केंद्र की स्थापना की.

अप्रैल 2017 में उनकी पत्नी ली डरेल ने जमशेदपुर आकर लोयोला स्कूल में ‘डरेल सेंटर’ का उद्घाटन किया था.जमशेदपुर में जन्मे इस अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त लेखक के नाम पर स्थापित राष्ट्रीय अंग्रेज़ी पुस्तक पुरस्कार शहर की साहित्यिक विरासत को विश्व साहित्य से जोड़ने का प्रयास है. इसका उद्देश्य उत्कृष्ट अंग्रेज़ी लेखन को प्रोत्साहित करना तथा साहित्य के माध्यम से प्रकृति एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाना है.डॉ. कुमार सुरेश सिंह पुरस्कार — झारखंड साहित्य, संस्कृति एवं विरासतडॉ. कुमार सुरेश सिंह प्रख्यात इतिहासकार, मानवविज्ञानी एवं भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी थे.

वे रांची विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति तथा भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण के महानिदेशक रहे. बिरसा मुंडा के उलगुलान आंदोलन पर उनका ऐतिहासिक शोध और उनके नेतृत्व में संचालित ‘People of India’ परियोजना भारतीय समाज एवं जनजातीय इतिहास के अध्ययन की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं.उनके नाम पर स्थापित यह पुरस्कार झारखंड के इतिहास, जनजातीय संस्कृति, भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत के शोध, संरक्षण एवं दस्तावेजीकरण को प्रोत्साहित करने का संकल्प है.

इसका उद्देश्य राज्य की समृद्ध बौद्धिक और सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय पहचान दिलाना है.उदन्त मार्तण्ड पुरस्कार — पत्रकारिता’उदन्त मार्तण्ड’ हिंदी पत्रकारिता का प्रथम समाचारपत्र था, जिसका प्रकाशन 30 मई 1826 को कोलकाता से पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने प्रारंभ किया था.

सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हिंदी भाषा में स्वतंत्र पत्रकारिता की आधारशिला रखी. वर्ष 2026 हिंदी पत्रकारिता के इस ऐतिहासिक आरंभ का द्विशताब्दी वर्ष भी है.हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्षों की गौरवशाली विरासत को समर्पित यह पुरस्कार निर्भीक, निष्पक्ष और जनसरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता को सम्मानित करेगा.डॉ. रामदयाल मुंडा पुरस्कार — जनजातीय कला एवं संस्कृति संरक्षणपद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा झारखंड के महान शिक्षाविद्, भाषाविद्, साहित्यकार, लोककलाकार एवं जनजातीय सांस्कृतिक चेतना के अग्रदूत थे.

वे रांची विश्वविद्यालय के कुलपति रहे और उन्होंने आदिवासी भाषाओं, लोकसंगीत, नृत्य तथा सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में आजीवन योगदान दिया. वर्ष 2010 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया.उनके नाम पर स्थापित यह पुरस्कार देशभर की जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को समर्पित है.गोपालदास मुखर्जी पुरस्कार — विरासत एवं पर्यटन (विशेष थीम आधारित पुरस्कार)गोपालदास मुखर्जी झारखंड के दुमका जिले के ऐतिहासिक मंदिर ग्राम मलूटी की सांस्कृतिक विरासत के समर्पित संरक्षक थे. भारतीय वायुसेना में सेवा और शिक्षण कार्य के बाद उन्होंने मलूटी के प्राचीन टेराकोटा मंदिरों के इतिहास, शोध और संरक्षण के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए.

उनके कार्यों ने इस ऐतिहासिक धरोहर की पहचान और संरक्षण की आवश्यकता को व्यापक स्तर पर सामने लाने में योगदान दिया.जेएलएफ की ‘विरासत एवं पर्यटन’ थीम के अंतर्गत यह पुरस्कार झारखंड की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन विकास के प्रति समर्पित व्यक्तियों के सम्मान का प्रतीक है. इसका उद्देश्य राज्य की विरासतों को राष्ट्रीय पहचान दिलाना है.मिसेज कियोके मोनरो पेरिन विद्यालय पुरस्कार — संस्थागत शिक्षाश्रीमती कियोके मोनरो पेरिन टाटा स्टील की स्थापना से जुड़े अभियंता चार्ल्स पेज पेरिन की पत्नी थीं और जमशेदपुर में प्रारंभिक शिक्षा के प्रसार में उनकी विशेष रुचि थी.

उनकी स्मृति में 21 जून 1915 को जमशेदपुर का पहला विद्यालय, मिसेज केएमपीएम स्कूल स्थापित किया गया. इस ऐतिहासिक विद्यालय ने शहर की शैक्षणिक परंपरा की आधारशिला रखी.जमशेदपुर के पहले विद्यालय की स्मृति में स्थापित यह संस्थागत पुरस्कार गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा, नवाचार, समावेशिता और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित है. इसका उद्देश्य उत्कृष्ट विद्यालयों को सम्मानित करते हुए जमशेदपुर की शताब्दी पुरानी शैक्षणिक विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ना है.

पुरस्कारों के माध्यम से विरासत के संरक्षण का संकल्पआयोजन समिति के सदस्य कमल किशोर अग्रवाल ने कहा कि जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल का मानना है कि इन महान व्यक्तित्वों के नाम पर स्थापित पुरस्कारों का उद्देश्य उनके विचारों, कार्यों और सांस्कृतिक योगदान को नई पीढ़ियों तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण प्रयास भी है.इन दस पुरस्कारों के माध्यम से फेस्टिवल भारतीय साहित्य, कला, शिक्षा, पत्रकारिता एवं सांस्कृतिक विरासत की महान परंपराओं को सम्मानित करने के साथ झारखंड की अपनी विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित करने का संकल्प व्यक्त करता है.

आयोजन समिति के सदस्य मंटू अग्रवाल ने बताया कि प्रत्येक पुरस्कार के लिए एक लाख रुपये की सम्मान राशि होगी. पुरस्कार प्राप्त करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं का चयन निर्णायक मंडल द्वारा किया जाएगा. इसके लिए कोई नामांकन प्रक्रिया नहीं है और न ही कोई अंतिम तिथि निर्धारित है. चयनित नामों की घोषणा आयोजन समिति द्वारा आगामी दिनों में अलग से की जाएगी.जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2.0 का आयोजन 18 से 20 दिसंबर 2026 तक होटल रमाडा, बिष्टुपुर, जमशेदपुर में किया जाएगा. तीन दिवसीय आयोजन में देशभर के साहित्यकार, कलाकार, शिक्षाविद्, इतिहासकार, पत्रकार और संस्कृति एवं पर्यटन क्षेत्र के विशिष्ट व्यक्तित्व भाग लेंगे.जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के बारे मेंजमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) का पहला आयोजन 20-21 दिसंबर 2025 को होटल रमाडा, जमशेदपुर में हुआ था.

विद्यादीप फाउंडेशन द्वारा आयोजित यह फेस्टिवल साहित्य, कला और संस्कृति के माध्यम से जमशेदपुर और झारखंड की पहचान को राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने का प्रयास है.

संपर्क:

संदीप मुरारका, क्यूरेटर – जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवलविद्यादीप फाउंडेशन, जमशेदपुरमोबाइल: 7979817507

ईमेल: jamshedpurliteraturefestival@spypostnewsgmail-com

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राजनीति और सामाज के अंदर तक घुसपैठ कर चुके विषैले विषाणुओं को मारने वाला किटाणुनाशक....
एडवेंचर पत्रकारिता से प्यार और किसी भी कीमत पर सच सामने लाने की जिद.....
"जो नहीं हो सकता वहीं तो करना है".....

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