जेएचआरसी ने एमजीएम अस्पताल और सदर अस्पताल के कचड़े के प्रबंधन में अनियमितता को लेकर गंभीर सवाल उठाया
जमशेदपुर ।
एमजीएम अस्पताल और सदर अस्पताल में अस्पतालीय कचड़े के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड मानवाधिकार सम्मेलन- जेएचआरसी ने गंभीर सवाल उठाए हैं तथा जाँच की मांग की है । संगठन के प्रमुख मनोज मिश्रा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आदित्यपुर स्थित झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के क्षेत्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में किशोर वर्मा, सालावत महतो, गुरुमुख सिंह और ऋषि गुप्ता भी शामिल थे। मनोज मिश्रा ने बताया कि क्षेत्रीय पदाधिकारी जितेंद्र सिंह ने प्राप्त शिकायत पर त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन साथ ही उन्होने स्टाफ की कमी का हवाला देते हुए अस्पतालों के मेडिकल कचरे की निगरानी और उल्लंघन पर कार्रवाई करने में कठिनाई होने की बात भी कही।
इस पर जेएचआरसी प्रमुख मनोज मिश्रा ने कहा कि यदि कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में अपने को अक्षम पाता है तो उन्हें अपने पद पर बने रहने और पूरा वेतन लेने के औचित्य पर सवाल उठता है | उन्होंने राज्य सरकार से ऐसे अधिकारी को पद से हटाने पर विचार करने एवं प्रदूषण नियंत्रण कार्यालय में पर्याप्त कर्मचारियों की व्यवस्था करने की मांग की।
जेएचआरसी की ओर से क्षेत्रीय पदाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि संगठन की टीम ने 3 अक्टूबर को एमजीएम अस्पताल और 7 अक्टूबर को सदर अस्पताल का निरीक्षण किया था। इस दौरान अस्पताल परिसर में मेडिकल कचरा खुले में बिखरा मिला और उसके सामान्य नगरपालिका कचरे के साथ मिश्रित होने की आशंका जताई गई।
संगठन ने इसे जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताते हुए दोनों अस्पतालों में तत्काल औचक जांच, कचरे के पृथक्करण से लेकर अंतिम निस्तारण तक की व्यवस्था के सत्यापन तथा दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। मनोज मिश्रा ने कहा कि फरवरी 2026 में झारखंड उच्च न्यायालय ने अस्पतालों से निकलने वाले जैव-चिकित्सा कचरे के उचित निस्तारण को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।
इसके तहत एक माह के भीतर सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मेडिकल कचरे के उचित निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने, 30 से अधिक बेड वाले स्वास्थ्य केंद्रों में बायो-मेडिकल वेस्ट मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने और 30 से कम बेड वाले संस्थानों में नोडल पदाधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने कहा कि जिला उपायुक्त और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आपसी समन्वय से इन निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करना था।
जैव-चिकित्सा कचरे को सामान्य अस्पताल कचरे के साथ मिश्रित न होने देने की निगरानी की जिम्मेदारी भी जिला प्रशासन को दी गई थी। मिश्रा के अनुसार, सात माह बाद भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। एमजीएम और सदर अस्पताल में गायों और कुत्तों को जैव-चिकित्सा कचरे में मुंह मारते देखा गया तथा अस्पताल परिसर में कचरा जगह-जगह बिखरा मिला।
जेएचआरसी ने इसे मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत गंभीर मामला बताते हुये पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां के सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में भी औचक निरीक्षण कराने और उच्च न्यायालय के आदेश का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग की है। संगठन ने ज्ञापन की प्रतिलिपि कोल्हान के तीनों जिलों के उपायुक्तों और सभी सिविल सर्जनों को भी भेजी है।

