भुंइयाडीह में गरीबों के आशियाने उजड़ रहे थे, सांसद विद्युत वरण महतो विवाह समारोह में व्यस्त थे…..

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भुंइयाडीह में गरीबों के आशियाने उजड़ रहे थे, सांसद विद्युत वरण महतो विवाह समारोह में व्यस्त थे…..
जमशेदपुर शहर का टाटा स्टील कमांड एरिया हमेशा से सामाजिक और प्रशासनिक रूप से त्रिशंकु वाली स्थिति में रहा है। जमीन झारखंड सरकार की, लीज टाटा स्टील का, परंतु प्रशासनिक हस्तक्षेप जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी की।
दैवीय रूप से गरीबों के लिए शापित यह नगरी हमेशा से पूंजीपतियों की रखैल और वंचित वर्गों के लिए भस्मासुर की तरह रही है।
माननीय उच्च न्यायालय के आदेश को ढाल बनाकर (हालांकि वह आदेश किसी ने देखी नहीं है) जमशेदपुर शहर को गरीबी से नहीं बल्कि गरीबों से मुक्त करने के साजिश वर्षों से चली आ रही है।
मुख्य बातें—-
👉👇जब सरयू राय जमशेदपुर पूर्वी के विधायक थे, तो उन्होंने यातायात व्यवस्था के गतिरोध को दुरुस्त करने के लिए भुंइयाडीह लिट्टी चौक से एन एच 33 तक फ्लाई ओवर और स्वर्ण रेखा नदी पर एक नई पुल की परिकल्पना की।
जब इस प्रोजेक्ट को इंजीनियरों ने डिजाइन किया होगा तो उन्हें अच्छे से मालूम रहा होगा कि सड़क चौड़ीकरण की जद में भुंइयाडीह का वह क्षेत्र भी आएगा, जिसे प्रशासन ने बीते दिनों तोड़ा है।
👉 जमशेदपुर पूर्वी की वर्तमान विधायक श्रीमती पूर्णिमा दास साहू ने मात्र कुछ दिनों पहले ही उस 40 करोड़ की प्रोजेक्ट की शुरुआत की घोषणा की।

इसके ठीक दूसरे दिन गरीबों के आशियानों को उजाड़ने बुलडोजर और जेसीबी गरज उठे। एक विधायक के तौर पर तो उन्हें भी जानकारी रही होगी कि सड़क चौड़ीकरण की जद में भुंइयाडीह में गरीबों के आशियाने भी आएंगे परंतु उन्होंने भी मौन व्रत साधे रखा।
👉👇 सवाल यह भी उठ रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने अपने मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में गरीबों को मालिकाना हक क्यों नहीं दिया?
👉👇 इन सब से इतर जमशेदपुर के लोकसभा सांसद विद्युत वरण महतो निर्विकार और आध्यात्मिक चेतना में लीन होकर समाज के सबसे निचले तबके की बर्बादी की खबर धृतराष्ट्र बन कर अपने संजय से आंखों देखी घटना का सीधा प्रसारण देखते रहे।
यही नहीं मानगो में बन रहे फ्लाई ओवर को लेकर भी जोरदार विवाद उत्पन्न होने के बावजूद सांसद ने एकादशी का मौन व्रत जारी रखा।
एक घिसे पिटे राजनेता की छवि को आत्मसात कर उन्होंने सब्जी विक्रेताओं मानगो , एमजीएम के गरीब दुकानदारों, लाल बाबा फाउंड्री के असहाय गरीबों के सामाजिक विनाश की खबरों को जानने के बाद भी एक लाचार मजबूर और असहाय सांसद की अपनी इमेज को टूटने नहीं दिया।
पूर्व मंत्री दुलाल भुंइया द्वारा इस मामले को जोरदार तरीके से उठाने के बाद बैक फुट पर आए सांसद ने मजबूरीवश उपायुक्त से मुलाकात की।
पिछले साढ़े ग्यारह वर्षों से लगातार शहर के सांसद हैं , परंतु इनकी गतिविधियों की जानकारी लेने पर पाया गया कि उस दिन सांसद शहर के पूंजीपतियों के यहां आयोजित होने वाले निजी कार्यक्रमों में व्यस्त थे।
सांसद को इस वक्त उन गरीबों का सहारा बनना चाहिए जिनका सड़क चौड़ीकरण और माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के बोझ तले सब कुछ बर्बाद हो गया।

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