समुचित कारण के रहते संज्ञेय अपराध की जानकारी यदि पुलिस अधिकारी एफआईआर के रूप मे दर्ज नही करते है या दर्ज करने से इंकार करते है तो भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 173(4) के तहत पीड़ित व्यक्ति इसकी शिकायत लिखित रूप में डाक द्वारा संबंधित पुलिस अधीक्षक को भेज सकता है। उक्त जानकारी मानवाधिकार कार्यकर्त्ता मनोज मिश्रा ने झारखण्ड सिविल राइट्स एसोसिएशन ( जेसीआरए ) के मानगो मे आयोजित मानवाधिकार जागरूकता कार्यक्रम के तहत बतौर मुख्य अतिथि दी | उन्होंने कहा यदि पुलिस अधीक्षक शिकायत से संतुष्ट हो तो स्वयं मामले की जांच करेंगे या अपने अधीनस्थ किसी पुलिस अधिकारी को इस संहिता के अनुसार जांच करने का निर्देश देंगे। ऐसे अधिकारी को उस अपराध के संबंध में सम्बंधित पुलिस स्टेशन प्रभारी के सभी अधिकार प्राप्त होंगे।
यदि पुलिस अधीक्षक ऐसा नहीं करते, तो प्रभावित व्यक्ति मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 175(3) के तहत आवेदन कर सकता है। जहाँ इसकी सुनवाई की जाएगी | दोषी पाए जाने पर सम्बंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू हो सकती है | दोषी अधिकारी की वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है, उन्हें पदावनति, निलंबन या बर्खास्तगी भी करना पड़ सकता है | यह प्रावधान पुरानी CrPC की धारा 154(3) के समान है, जो FIR दर्ज न होने पर राहत प्रदान करता है। आज के जागरूकता कार्यक्रम मे मनोज मिश्रा के अलावा संस्था के विष्णु लाल, जिष्णु महतो के साथ साथ जीवन ज्योति से आर बी सहाय, बी एल प्रसाद, जीतेन्द्र राय, बी के दास, एस पी सिंह मुख्य रूप से शामिल थे |



