किसी पुरुष नेता के दिमाग़ में ही यह नहीं आएगा और न हिम्मत होगी। सेंट्रल जांच एजेंसी के छापे की जगह पहुंचकर उनका घेराव करकर फाइल्स निकाल लाना, यह किसी सिलेबस में नहीं लिखा है।
अभिषेक बनर्जी होते तो चुपचाप रेड देखते, और ईडी द्वारा रचाये खेल में फंसकर रह जाते। यह कॉन्फिडेंस ममता बनर्जी की मौलिक कल्पना है। मोदी-शाह दो दिनों से यही सोच रहे होंगे कि यह हुआ क्या।
ममता बनर्जी जननेत्री हैं। सी.पी.एम. से लड़कर, गुंडों और पुलिस की मार खाकर यहां तक आई हैं। उन्हें जीवन प्लेट में सजाकर नहीं मिला। उन्होंने उसे बनाया है। ईडी से फाइल छीनकर कलकत्ते की सड़कों पर लाखों लोगों को लेकर उतर गईं। सारा नैरेटिव पलट दिया। बीजेपी की आईटी सेल का इसपर सारा नैरेटिव भरभराकर गिर गया है। ममता लगातार आक्रमण कर रही हैं।
पूरे भारत का विपक्ष मोदी-शाह के आगे नतमस्तक हो गया है उस जोड़ी को इस महिला ने पानी पिला रखा है। लोगों के घर ईडी की रेड होती है ममता ने ईडी के यहाँ रेड मार दी।
अकूत पैसे,सेंट्रल एजेंसियों के दुरुपयोग, मीडिया और ताक़त के आगे ममता बनर्जी अकेली खड़ी हैं। उनकी हिम्मत और आत्मविश्वास को देखकर यह भीड़ जुटी है। पूरे भारत में बंगाल की जो झूठी और ग़लत छवि बनाई जा रही है ममता की जगह कोई और होता तो लड़ नहीं पाता। दूसरे राज्यों के अनुभव इसके उदाहरण हैं।
मोदी-शाह फुलटाइम राजनीति करते हैं, उनको पार्ट टाइम राजनीति करके हराया नहीं जा सकता। बिहार में, दिल्ली में, यूपी में लोगों के घर, दुकानें गिराई जा रही हैं, वहां का विपक्ष आंदोलन नहीं कर रहा जबकि ममता ने बंगाल को इस तरह की राजनीति का विलोम बना दिया है।
महाराष्ट्र का समूचा विपक्ष बीजेपी निगल गयी। उद्धव रुदन कर रहे हैं। कांग्रेस के तो आधे नेता बीजेपी में सांसद और विधायक ही हैं।टीएमसी अबतक मज़बूती से खड़ी है। क्या वह बंगाल फिर जीतेगी और पिछली जीत से बड़ी जीत होगी?

