टाटा ग्रुप से चंद्रशेखरन की विदाई के क्या हैं मायने…..

टाटा ग्रुप में बड़ा बदलाव होने वाला है भाई। जिस आदमी ने टाटा को करीब 3 गुना तक बढ़ाया, एयर इंडिया से लेकर EV, सेमीकंडक्टर, iPhone मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल बिजनेस तक बड़े-बड़े दांव लगाए, वही एन. चंद्रशेखरन फरवरी 2027 के बाद टाटा संस के चेयरमैन नहीं रहेंगे।
अब सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? खास बात ये है कि चंद्रशेखरन को हटाया नहीं गया है। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है। लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि वह अगली टर्म के लिए नाम नहीं मांगेंगे, क्योंकि बोर्ड में उनकी दोबारा नियुक्ति को लेकर पूरी तरह से सर्वसम्मति नहीं थी।
इसको समझने के लिए पहले टाटा ग्रुप का सिस्टम समझो। टाटा कोई एक कंपनी नहीं है। इसके बीच में सबसे बड़ी कंपनी है टाटा संस, जो टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और कई बड़ी टाटा कंपनियों में मालिकाना हिस्सेदारी रखती है।
टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी टाटा ट्रस्ट्स की है। इसलिए TCS, Tata Motors, Titan या Tata Power जैसी कंपनियां अपने-अपने तरीके से चलती जरूर हैं, लेकिन टाटा के पूरे मालिकाना ढांचे में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका बहुत बड़ी है।
अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के निधन के बाद नोएल टाटा टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन बने। इसका मतलब ये नहीं है कि नोएल टाटा रोज TCS या Tata Motors चलाते हैं। लेकिन टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन होने के नाते वह टाटा के सबसे बड़े मालिकाना ढांचे के एक बेहद अहम हिस्से पर बैठे हैं। इसलिए अब जब चंद्रशेखरन की टर्म खत्म होने वाली है, तो अगला टाटा संस चेयरमैन कौन होगा, इसमें ट्रस्ट्स की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।
अब चंद्रशेखरन के काम को देखो। जब उन्होंने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी, तब टाटा की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 8.4 लाख करोड़ रुपये था। आज यह 27 लाख करोड़ रुपये से ऊपर है। यानी ग्रुप की वैल्यू में बहुत बड़ी बढ़ोतरी हुई है।
और उनके कार्यकाल में टाटा ने सिर्फ पुराने बिजनेस चलाने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि भविष्य के लिए भी बड़े दांव लगाए। एयर इंडिया को खरीदा, EV में पैसा लगाया, Tata Electronics को बढ़ाया, सेमीकंडक्टर में उतरा, iPhone की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की और डिजिटल बिजनेस में भी भारी निवेश किया।
लेकिन यहीं से असली बहस शुरू होती है। इतने बड़े प्रोजेक्ट्स में पैसा तो बहुत लग रहा है, लेकिन उससे कमाई कब शुरू होगी? हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में एयर इंडिया, टाटा डिजिटल और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे नए बिजनेस का कुल नुकसान करीब 29,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
अब सोचो, एक तरफ तर्क है कि ये बिजनेस आज नुकसान दे रहे हैं, लेकिन अगर सही तरीके से खड़े हो गए तो अगले 10-20 साल तक टाटा के लिए बहुत बड़ा पैसा बना सकते हैं। दूसरी तरफ सवाल है कि भाई, आखिर कितनी पूंजी लगानी है और उसका रिटर्न कब मिलेगा?
यानी मामला ये नहीं है कि चंद्रशेखरन अच्छे थे या खराब। असली बहस है तेजी से ग्रोथ के लिए पैसा लगाना या पहले से चल रहे बिजनेस से ज्यादा रिटर्न निकालना।
अगले टाटा संस चेयरमैन के सामने भी आसान काम नहीं होगा। उन्हें कोई डूबा हुआ ग्रुप नहीं मिलेगा जिसे बचाना है। उन्हें ऐसा विशाल ग्रुप मिलेगा जो पहले ही बहुत बड़ा हो चुका है और जिसने भविष्य के लिए कई बेहद महंगे दांव लगा रखे हैं।
इसलिए अगर आपके पास TCS, Tata Motors, Titan, Tata Power, Tata Steel या किसी और टाटा कंपनी का शेयर है, तो सिर्फ ये मत देखना कि अगला चेयरमैन कौन बनता है। असली चीज ये देखना कि वह टाटा का पैसा कहां लगाएगा, कितना लगाएगा और उस पैसे से रिटर्न कब निकलेगा।
क्योंकि टाटा अब सिर्फ अपना अगला चेयरमैन नहीं चुन रहा। हो सकता है, वह अगले 10 साल के लिए अपनी पूरी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी चुन रहा हो।
