सिविल सर्जन और MGM Hospital Superintendent सिर्फ नाम के, दम तोड़ रही है जिले की स्वास्थ्य सेवाएं…..

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सिविल सर्जन और MGM Hospital Superintendent सिर्फ नाम के, दम तोड़ रही है जिले की स्वास्थ्य सेवाएं…..

हमने पहले भी आपको बताया था कि एमजीएम अस्पताल का मतलब महात्मा गांधी मेमोरियल अस्पताल नहीं “महात्मा गांधी मोक्ष” अस्पताल है। आज जरूरत है किसी योग्य व्यक्ति को शहर का सिविल सर्जन बनाने की और एमजीएम अस्पताल का सुपरिटेंडेंट बनाने की क्योंकि आए दिन इस अस्पताल में अजीबो गरीब हालात देखने को मिलते रहते हैं। ताजा मामला यह है कि एक बच्चे को सांप ने काटा और उसके परिजन जब उसे एमजीएम अस्पताल लेकर गए तो ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर इशिता की घोर लापरवाही नजर आई।

कहीं पढ़ा था की विदेशी सोचते हैं कि भारत सांपों और संपेरों का देश है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में सांप के काटने पर लोग अस्पताल जाने की बजाय संपेरों और तांत्रिकों को बुलाकर इलाज करवाना पसंद करते हैं।
कई दशक लगे सरकार को इन्हें समझाने में, इन्हें जागरूक करने में की सर्पदंश का इलाज झाड़-फूंक नहीं अस्पताल में है।
और जब लोग अस्पताल पहुंचने लगे तो अस्पताल में तैनात डॉक्टरों द्वारा अनदेखी और लापरवाही की खबरें आने लगी। आज 27 अगस्त 2025 को ग्रामीण क्षेत्र की एक महिला अपने डेढ़ वर्षीय बेटे को सांप के काटने पर एमजीएम अस्पताल लेकर पहुंची।
अस्पताल में ड्यूटी में तैनात डॉक्टर इशिता द्वारा सही तरीके से बच्चे का इलाज नहीं करने का आरोप परिजनों ने लगाया। बच्चे की नाजुक स्थिति को देखते हुए परिजन और समाजसेवी पप्पू सिंह डॉक्टर इशिता से तत्काल इलाज शुरू करने की गुहार लगाते रहे, परंतु डॉक्टर इशिता अपने चेयर से टस से मस नहीं हुईं ।
दरअसल पूरा मामला हैसियत का होता है। उस मासूम गरीब बच्चे की जगह अगर कोई विधायक, मंत्री या उनके परिजन होते तो उनके लिए अविलंब बाहर इलाज करवाने तक के लिए उड़न खटोले या चार्टर्ड प्लेन की व्यवस्था हो गई होती।
परंतु यहां बात एक ग्रामीण क्षेत्र के गरीब बच्चे की थी, तो अगर लापरवाही और इलाज के अभाव में उसे बच्चे की जान भी चली जाती तो सामान्य बात होती।
ऊपर से अगर परिजन विरोध करें तो उनके ऊपर पुलिस केस होता, डॉक्टर हड़ताल कर देते और आईएमए जमशेदपुर उनके समर्थन में बयान जारी करता।
परंतु ऐसे मामलों में जहां मानवता दम तोड़ रही हो, सब कुछ मैनेज कर लेने की प्रवृत्ति हावी हो, भ्रष्टाचार अपने चरम पर हो, जिले के सिविल सर्जन से जिले की स्वास्थ्य सेवा फिसल रही हो, एमजीएम अस्पताल सुपरिटेंडेंट अस्पताल को संभालने में असफल साबित हो रहे हों, राजनीतिक रसूख और पैरवी का बोलबाला हो वहां ऐसे विषयों पर समाचार प्रकाशित करना भी अपराध माना जाएगा।

नोट- अपने पाठकों से मिल रहे स्नेह और सम्मान के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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