अमित शाह के बेलगाम घोड़े ED का होमियोपैथी इलाज अभी ममता बनर्जी कर ही रही हैं कि झारखण्ड में हेमंत सोरेन की पुलिस ने उसकी एलोपैथी चिकित्सा शुरू कर दी है।
झारखण्ड पुलिस ने रांची के ईडी दफ्तर पर आज तब रेड मारी जब उधर सुप्रीम कोर्ट में ईडी के वकील गुहार लगा रहे थे कि राज्यों द्वारा केंद्र की एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई का ट्रेंड बन सकता है।
कभी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गिरेबान में ईडी ने हाथ डाला था। आज सोरेन सरकार की पुलिस ने रांची स्थित ED दफ्तर पर ऐसा धावा बोला कि पूरा तंत्र हिल गया।
सदर डीएसपी के नेतृत्व में एयरपोर्ट थाना प्रभारी सीधे ED ऑफिस में दाखिल हुए।
हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि ED के सहायक निदेशक प्रतीक को अर्धसैनिक बल की टुकड़ी बुलानी पड़ी। यानी केंद्रीय एजेंसी अपने ही दफ्तर में सुरक्षा मांगने को मजबूर हो गई।
पूरा बवाल पेयजल विभाग के कर्मचारी संतोष कुमार से जुड़ा है, जिस पर कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है और जिसकी जांच ED कर रही है।
संतोष कुमार का आरोप है कि ED के सहायक निदेशक प्रतीक और उनके सहयोगी ने उन्हें केबिन में बंद कर बेरहमी से पीटा, सिर में इतने गंभीर जख्म दिए कि छह टांके लगवाने पड़े।
संतोष ने FIR में यह भी दावा किया गया है कि ED अधिकारी जबरन उनसे अपराध स्वीकार करवाने का दबाव बना रहे थे। साथ ही पूर्व से तैयार ड्राफ्ट पर जबरदस्ती दस्तखत करवाये।
इस सनसनीखेज आरोप के बाद ही सदर डीएसपी मौके पर जांच के लिए पहुंचे।
हालांकि रेड के नतीजों के बारे में झारखंड पुलिस के अंतिम बयान आना बाकी है।
इतना तो तय है कि जनता में ईडी की एक ऐसी छवि बन गई है जो गृह मंत्रालय के बेलगाम घोड़े की तरह काम करती है।
इस लिए लोगों में ईडी की विश्वसनीयता भी नहीं बची है और न ही उसके प्रति हमदर्दी का भाव है।
साथियों हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर से उतार कर इसी ईडी ने जेल में ठूस दिया था। ऐसे में झारखंड पुलिस की इस कार्रवाई को आप कैसे देखते हैं?



