मोकामा– पुलिस ने गिरफ्तार करने से पहले हत्या में अनंत सिंह की भागीदारी को माना…..

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अनंत सिंह की गिरफ्तारी के मामले में पुलिस ने जो सबसे महत्वपूर्ण तथ्य बताया है कि दुलारचंद की हत्या उनके सामने हुई है। पुलिस ने इस तरह इस हत्या में उनकी भागीदारी को भी माना है।

अब जाहिर है कि अनंत सिंह आदतन अपराधी हैं। मगर बड़ा सवाल है कि ऐसे लोगों को बिहार की पार्टियां बार बार टिकट क्यों देती है? क्या चुनाव जीतना ही सब कुछ है? क्या चुनाव जीतने से बड़ी जिम्मेदारी बिहार की छवि को बेहतर बनाना और यहां के मानस को बदलना नहीं है? क्यों नीतीश कुमार जैसे नेता भी इस लाभ लालच से उबर नहीं पाए?

बड़ा सवाल जातियों में बंटे वोटरों के लिए भी है। वह क्यों अपना नायक ऐसे आदतन अपराधी में तलाशती है। कल इन तमाम मसलों पर जेएनयू के एक रिसर्चर से बात हुई जो इस विषय में पीएचडी कर रहे हैं।

उन्होंने बिहार में राजनीति के क्षेत्र में अब तक सक्रिय रहे 80 बड़े अपराधियों की सूची बनाई है। हैरत की बात है कि इनमें ज्यादातर पांच जातियों के लोग हैं, भूमिहार, यादव, राजपूत, ब्राह्मण और मुस्लिम। इनके अलावा शायद ही किसी जाति से कोई बड़ा अपराधी राजनीति में है। अगर हैं भी तो बहुत नगण्य।

क्या यह बड़ा सवाल नहीं है कि ये जातियां क्यों अपने अपराधियों को मसीहा समझने लगती है? क्या उनके पास साफ चरित्र के नायक नहीं है?

इक्कीसवीं सदी के बदलते बिहार को अब इन सवालों के बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।

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