डिपार्टमेंटल पार्किंग के नाम पर वसूली का आरोप, धर्मेंद्र प्रसाद और जेएनएसी की भूमिका पर उठे सवाल…..
जमशेदपुर में पार्किंग व्यवस्था को लेकर नया विवाद, लाखों रुपये की वसूली के दावे की जांच की मांग..
जमशेदपुर।
शहर में पार्किंग व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जमशेदपुर पश्चिम के विधायक के करीबी होने का दावा करने वाले भाजपा नेता धर्मेंद्र प्रसाद द्वारा जेएनएसी क्षेत्र में डिपार्टमेंटल पार्किंग के नाम पर लोगों से बड़ी रकम की वसूली की जा रही है।
इस पूरे मामले में जेएनएसी के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में धर्मेंद्र प्रसाद को फरवरी 2025 में सरयू राय द्वारा जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति का जनसुविधा प्रतिनिधि बनाए जाने की जानकारी मिलती है।
वहीं 2026 में धर्मेंद्र प्रसाद की भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय मौजूदगी भी दर्ज है। पार्किंग के नाम पर आखिर किसके आदेश से वसूली?सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्थानों पर पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है, वहां पार्किंग संचालित करने की अनुमति किसके द्वारा दी गई है? वसूली की राशि किस खाते में जमा हो रही है और इसके लिए क्या आधिकारिक रसीद, टेंडर अथवा विभागीय आदेश जारी किया गया है?यदि वास्तव में विभागीय पार्किंग के नाम पर लाखों रुपये की वसूली हो रही है, तो जेएनएसी को इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
इसमें पार्किंग स्थल, ठेका/अनुमति की अवधि, वसूली की दर, प्रतिदिन की अनुमानित वसूली और सरकारी खाते में जमा राशि का विवरण सामने आना चाहिए।योगेंद्र प्रसाद की भूमिका पर भी सवाल…..इस मामले में जेएनएसी के नगर आयुक्त योगेंद्र प्रसाद की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध हालिया रिपोर्टों के अनुसार योगेंद्र प्रसाद जून 2026 में जेएनएसी के पहले नगर आयुक्त के रूप में पदभार ग्रहण कर चुके हैं, जबकि कृष्ण कुमार उप नगर आयुक्त के पद पर हैं।ऐसे में धर्मेंद्र प्रसाद और जेएनएसी अधिकारियों के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत के आरोपों की पुष्टि के लिए आधिकारिक दस्तावेज, पार्किंग अनुमति, टेंडर रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच जरूरी है।
जांच से साफ हो सकता है पूरा खेल…..
पार्किंग के नाम पर यदि नियमों के अनुरूप शुल्क लिया जा रहा है तो उसका पूरा रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। वहीं यदि बिना वैध अनुमति के वसूली की जा रही है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।अब सवाल यह है कि जेएनएसी इस कथित पार्किंग वसूली का हिसाब सार्वजनिक करेगा या नहीं? साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि पार्किंग से होने वाली आय सरकारी राजस्व में जा रही है या किसी निजी व्यक्ति/एजेंसी के पास।

